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वसंत श्री!
आज मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की वसंत ऋतु पर लिखी यह कविता – उस फैली हरियाली में,कौन अकेली खेल रही मा!वह अपनी वय-बाली में?सजा…
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‘फ़राज़’ तुम भी अगर
तवाफ़-ए-मंज़िल-ए-जानाँ हमें भी करना है, ‘फ़राज़’ तुम भी अगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़
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तुम्हें भी होश नहीं!
नशे में चूर हूँ मैं भी तुम्हें भी होश नहीं, बड़ा मज़ा हो अगर थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़
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थोड़ी दूर साथ चलो!
कठिन है राहगुज़र थोड़ी दूर साथ चलो, बहुत कड़ा है सफ़र थोड़ी दूर साथ चलो| अहमद फ़राज़
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प्यार!
आज मैं प्रसिद्ध हिन्दी कवि स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| उनकी कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दूधनाथ सिंह जी की यह कविता – स्तब्ध निःशब्दता में कहीं एक पत्ता खड़कता है।अंधेरे की खोह हलचल के प्रथम सीमान्त पर चुप–मुस्कुराती है।रोशनी की…