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विषबुझे खंजर न फेंक!
आज एक बार फिर से मैं अपने अग्रज और मेरे लिए गुरुतुल्य रहे श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक,चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न…
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जैसे जैसे घर नियराया!
आज मैं श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक छोटा सा और खूबसूरत नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| किस प्रकार हम अनेक प्रकार से अपने घर से जुड़े होते हैं| पुराने ग्रामीण परिवेश को याद करके इस गीत का और भी अच्छा आस्वादन किया जा सकता है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय…
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एक मैं कि तेरे नाम से, ना-आशना आवारगी|
आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग-पोस्ट को दोहरा रहा हूँ| एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- ’मैं नशे में हूँ’, यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो…
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वक़्त करता जो वफ़ा!
आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक नायाब गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत मुकेश जी ने फिल्म- ‘दिल ने पुकारा’ के लिए गाया था, इसे लिखा था इंदीवर जी ने और इसका संगीत तैयार किया था कल्याणजी – आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने| वक़्त के कारनामे बहुत से…
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बुनियाद हिलनी चाहिए!
स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की कुछ रचनाएं मैं पहले शेयर कर चुका हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे, परंतु उनको विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली थी आपातकाल में प्रकाशित उनकी विद्रोह के स्वर गुंजाने वाली ग़ज़लों से, जिन्हें बाद में उनके ग़ज़ल संकलन ‘साये में धूप’ में संकलित किया गया|…
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फिर-फिर वही सन्नाटा है!
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी अपने समय में हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे तथा प्रतिष्ठित समाचार-पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक मण्डल में भी थे| सर्वेश्वर जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे| आज मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह ग़ज़ल – अजनबी देश है यह, जी…
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तब भी तो तुम आए थे!
अली सरदार जाफरी साहब की एक नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| जाफरी साहब का नाम हिंदुस्तान के प्रसिद्ध शायरों में शामिल है और उनको भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था| लीजिए प्रस्तुत है अली सरदार जाफरी साहब की यह नज़्म- जब नहीं आए थे तुम, तब भी तो तुम आए थेआँख…
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ओ दुनिया के रखवाले!
आज मैं 1952 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बैजू बावरा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो भजन अथवा कहें कि पीड़ित भक्त के आर्तनाद के रूप में है, शकील बदायुनी साहब ने लिखा था और नौशाद साहब ने इसका संगीत दिया था, यह गीत रफी साहब के अनमोल गीतों में शामिल है, जिसमें उन्होंने…
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सूरज रोज़ निकलता है!
आज फिर से एक बार मैं हिन्दी कवि सम्मेलनों में किसी समय गूंजने वाले एक अलग प्रकार के स्वर- स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘निर्धन’ जी की कवि सम्मेलनों में उपस्थिति एक चमत्कारी प्रभाव डालती थी| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का यह गीत- रात-रात…
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वसंत का एक दिन – रवींद्रनाथ ठाकुर
लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे…