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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Nov 2022

    सब्र में भी हज़रत-ए-अय्यूब रहा हूँ!

    फेंक आए थे मुझ को भी मिरे भाई कुएँ में, मैं सब्र में भी हज़रत-ए-अय्यूब रहा हूँ| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ!

    दुनिया मुझे साहिल से खड़ी देख रही है, मैं एक जज़ीरे की तरह डूब रहा हूँ| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    वो भी ज़माना था कि मैं ख़ूब रहा हूँ!

    सच्चाई तो ये है कि तिरे क़र्या-ए-दिल में, इक वो भी ज़माना था कि मैं ख़ूब रहा हूँ| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    इसी शहर का महबूब रहा हूँ!

    अब कोई शनासा भी दिखाई नहीं देता, बरसों मैं इसी शहर का महबूब रहा हूँ| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ!

    दुनिया तिरी रौनक़ से मैं अब ऊब रहा हूँ, तू चाँद मुझे कहती थी मैं डूब रहा हूँ| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    बच्चे कभी सर्दी नहीं खाते!

    अल्लाह ग़रीबों का मदद-गार है ‘राना’, हम लोगों के बच्चे कभी सर्दी नहीं खाते| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    दवा भी नहीं खाते!

    दावत तो बड़ी चीज़ है हम जैसे क़लंदर, हर एक के पैसों की दवा भी नहीं खाते| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    कभी नींद की गोली नहीं खाते!

    सो जाते हैं फ़ुटपाथ पे अख़बार बिछा कर, मज़दूर कभी नींद की गोली नहीं खाते| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    न मिलेंगे ये क़सम भी नहीं खाते!

    तुमसे नहीं मिलने का इरादा तो है लेकिन, तुम से न मिलेंगे ये क़सम भी नहीं खाते| मुनव्वर राना

  • 16th Nov 2022

    क्यूँ शौक़ से मिट्टी नहीं खाते!

    हँसते हुए माँ-बाप की गाली नहीं खाते, बच्चे हैं तो क्यूँ शौक़ से मिट्टी नहीं खाते| मुनव्वर राना

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