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तुझे कैसे भूल जाऊँ!
आज एक बार फिर मैं स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ, दुष्यंत जी की बहुत सी ग़ज़लें और कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं, जैसा कि आप जानते हैं आपातकाल में लिखी गई ग़ज़लों के संकलन ‘साए में धूप’ से दुष्यंत जी को विशेष प्रसिद्धि मिली थी| लीजिए आज…
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अपनी नज़रों से गिरा था पहले!
ब’अद में मैंने बुलंदी को छुआ, अपनी नज़रों से गिरा था पहले| राजेश रेड्डी