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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jul 2023

    ये शिकायत ना हुई!

    दूर से था वो कई चेहरों में पास से कोई भी वैसा न लगा, बेवफ़ाई भी उसी का था चलन फिर किसी से ये शिकायत ना हुई| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    तिजारत ना हुई!

    जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले दिल जो बदला तो फ़साना बदला, रस्म-ए-दुनिया को निभाने के लिए हम से रिश्तों की तिजारत ना हुई| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    जीने की सूरत ना हुई!

    कुछ तबी‘अत ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत ना हुई, जिसको चाहा उसे अपना न सके जो मिला उससे मोहब्बत ना हुई| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    समझदारी से बचिए!

    बिना पैरों के सर चलते नहीं हैं, बुज़ुर्गों की समझदारी से बचिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    रवा-दारी से बचिए!

    ज़रूरी क्या हर इक महफ़िल में बैठें, तकल्लुफ़ की रवा-दारी से बचिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    बीमारी से बचिए!

    शराफ़त आदमियत दर्द-मंदी, बड़े शहरों में बीमारी से बचिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    हर इक सूरत!

    हर इक सूरत भली लगती है कुछ दिन, लहू की शो’बदा-कारी* से बचिए| *मंत्रमुग्ध करना निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    अदाकारी से बचिए!

    मोहब्बत में वफ़ादारी से बचिए, जहाँ तक हो अदाकारी से बचिए| निदा फ़ाज़ली

  • 7th Jul 2023

    याद तुम्हारी!

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी नवगीत के एक प्रमुख हस्ताक्षर श्री माहेश्वर तिवारी जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| माहेश्वर जी की कुछ कविताएं मैंने पहले भी शेयर की हैं|    लीजिए आज प्रस्तुत है श्री माहेश्वर तिवारी जी का यह नवगीत – याद तुम्हारी जैसे कोईकंचन-कलश भरे।जैसे कोई किरन अकेलीपर्वत…

  • 6th Jul 2023

    ये किस मक़ाम पे!

    ये किस मक़ाम पे पहुँचा दिया ज़माने ने, कि अब हयात पे तेरा भी इख़्तियार नहीं|    साहिर लुधियानवी

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