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राह तो एक थी!
आज एक बार फिर से मैं ‘कवियों के कवि’ कहलाने वाले स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| शमशेर जी की कुछ कविताएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शमशेर बहादुर सिंह जी की यह कविता – राह तो एक थी हम दोनों की…
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वो धूप के छप्पर हों!
वो धूप के छप्पर हों या छाँव की दीवारें, अब जो भी उठाएँगे मिल जुल के उठाएँगे| बशीर बद्र
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हम ओस के मोती हैं!
कह देना समुंदर से हम ओस के मोती हैं, दरिया की तरह तुझसे मिलने नहीं आएँगे| बशीर बद्र
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आँसू नहीं आएँगे!
ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे, रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे| बशीर बद्र
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अदावत ना हुई!
वक़्त रूठा रहा बच्चे की तरह राह में कोई खिलौना न मिला, दोस्ती की तो निभाई न गई दुश्मनी में भी अदावत ना हुई| निदा फ़ाज़ली
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शोहरत ना हुई!
छोड़ कर घर को कहीं जाने से घर में रहने की इबादत थी बड़ी, झूठ मशहूर हुआ राजा का सच की संसार में शोहरत ना हुई| निदा फ़ाज़ली
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किताब!
आज मैं श्रेष्ठ हिन्दी कवि श्री नन्द चतुर्वेदी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| श्री चतुर्वेदी जी की कविता मैं आज पहली बार शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नन्द चतुर्वेदी जी की यह कविता – उस तरह मैं नहीं पढ़ सकाजिस तरह चाहिएइस किताब में लिखी इबारत यह…