तिजारत ना हुई!

जिससे जब तक मिले दिल ही से मिले दिल जो बदला तो फ़साना बदला,

रस्म-ए-दुनिया को निभाने के लिए हम से रिश्तों की तिजारत ना हुई|

निदा फ़ाज़ली

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