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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jan 2023

    ज़िंदगी तुझको ढूँडती है अभी!

    शहर की बे-चराग़ गलियों में, ज़िंदगी तुझको ढूँडती है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    तेरी आवाज़ आ रही है अभी!

    याद के बे-निशाँ जज़ीरों से, तेरी आवाज़ आ रही है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी!

    तू शरीक-ए-सुख़न नहीं है तो क्या, हम-सुख़न तेरी ख़ामुशी है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    किस चीज़ की कमी है अभी!

    भरी दुनिया में जी नहीं लगता, जाने किस चीज़ की कमी है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    दीवार सी गिरी है अभी!

    शोर बरपा है ख़ाना-ए-दिल में, कोई दीवार सी गिरी है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    ये चोट भी नई है अभी!

    कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी, और ये चोट भी नई है अभी| नासिर काज़मी

  • 28th Jan 2023

    मैं नहीं आया तुम्हारे द्वार !

    आज मैं हिन्दी के एक प्रमुख कवि और शिक्षाविद स्वर्गीय शिवमंगल सिंह सुमन जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सुमन जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित कविता के अनेक सम्मानों के अलावा सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान पद्मश्री एवं पद्मभूषण से भी अलंकृत किया गया था| उन्होंने शिक्षा और प्रशासन के क्षेत्र में अनेक उच्च…

  • 27th Jan 2023

    कोई ताज़ा हवा चली है अभी!

    दिल में इक लहर सी उठी है अभी, कोई ताज़ा हवा चली है अभी| नासिर काज़मी

  • 27th Jan 2023

    बहुत रोए वो जब याद आया!

    बैठ कर साया-ए-गुल में ‘नासिर’, हम बहुत रोए वो जब याद आया| नासिर काज़मी

  • 27th Jan 2023

    रुख़्सत हुआ तब याद आया!

    हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन, जब वो रुख़्सत हुआ तब याद आया| नासिर काज़मी

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