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बादल घिरते देखा है!
आज मैं जनकवि बाबा नागार्जुन जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| बाबा नागार्जुन जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बाबा नागार्जुन जी का यह नवगीत – अमल धवल गिरि के शिखरों पर,बादल को घिरते देखा है।छोटे-छोटे मोती जैसेउसके शीतल तुहिन कणों को,मानसरोवर के उन…
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हुनर में आ गया हूँ!
छुपा न पाया कभी ख़ुद को अपने शे‘रों में, मैं जो हूँ जैसा हूँ अपने हुनर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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भँवर में आ गया हूँ!
ये सोचकर कि न दूँ नाख़ुदा को ये ज़हमत, उतर के कश्ती से ख़ुद ही भँवर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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तिरे हाथ की लकीरों में
न आ सका मैं तिरे हाथ की लकीरों में, यही बहुत है तिरी चश्म-ए-तर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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अपने घर में आ गया हूँ
उदास हो गया हूँ फिर से इक ज़रा हँस कर, में घूम-घाम के फिर अपने घर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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ख़बर में आ गया हूँ!
मिरी शनाख़्त की ख़ातिर छपी मिरी तस्वीर, न जीते-जी सही मर के ख़बर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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अगर से दो क़दम आगे
ज़रा सा फ़ासला मैंने भी तय किया तो है, अगर से दो क़दम आगे मगर मैं आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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मिरे हौसलों पे हैराँ है!
ये ज़िंदगी भी मिरे हौसलों पे हैराँ है, समझ रही थी कि मैं उसके डर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी
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सफर पुराना, मंज़िल पुरानी!
Originally posted on SamaySakshi: आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हमारे फैमिली ग्रुप का नाम ही रहा है- ‘लंदन, गोवा, बंगलौर’, क्योंकि एक-एक बेटा इन तीनों जगह रहते रहे हैं| हम दो बार लंदन भी रह आए हैं, एक बार- एक माह के लिए और…
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अधर में आ गया हूँ!
ज़मीं उछाल चुकी आसमाँ ने थामा नहीं, मैं काएनात में बिल्कुल अधर में आ गया हूँ| राजेश रेड्डी