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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Jul 2023

    रंगत फीकी पड़ गई!

    महक अजब सी हो गई पड़े पड़े संदूक़ में, रंगत फीकी पड़ गई रेशम के रूमाल की| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Jul 2023

    यही सदा घड़ियाल की!

    आई है अब याद क्या रात इक बीते साल की, यही हवा थी बाग़ में यही सदा घड़ियाल की| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Jul 2023

    चार पहर से पहले!

    जी बहलता ही नहीं अब कोई साअ‘त कोई पल, रात ढलती ही नहीं चार पहर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 27th Jul 2023

    घबराए न तरसे पहले!

    इश्क़ पहले भी किया हिज्र का ग़म भी देखा, इतने तड़पे हैं न घबराए न तरसे पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 27th Jul 2023

    धब्बे और तस्वीर!

    आज मैं अज्ञेय जी द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ एक महत्वपूर्ण कवि स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| उनकी ज्यादा रचनाएं मैंने शायद पहले शेयर नहीं की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुँवर नारायण जी की यह कविता – वह चित्र भी झूठा नहीं :तब प्रेम बचपन ही सहीसंसार ही जब…

  • 26th Jul 2023

    ख़ाक-बसर से पहले!

    चल दिए उठ के सू-ए-शहर-ए-वफ़ा कू-ए-हबीब, पूछ लेना था किसी ख़ाक-बसर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 26th Jul 2023

    इश्क़ में घर से पहले!

    अपने हमराह जो आते हो इधर से पहले, दश्त पड़ता है मियाँ इश्क़ में घर से पहले| इब्न-ए-इंशा

  • 26th Jul 2023

    मिरा मेहमाँ होता है!

    वो दर्द कि उसने छीन लिया वो दर्द कि उसकी बख़्शिश था, तन्हाई की रातों में ‘इंशा’ अब भी मिरा मेहमाँ होता है| इब्न-ए-इंशा

  • 26th Jul 2023

    रोज़ मुसलमाँ होता है!

    फिर उनकी गली में पहुँचेगा फिर सहव का सज्दा कर लेगा, इस दिल पे भरोसा कौन करे हर रोज़ मुसलमाँ होता है| इब्न-ए-इंशा

  • 26th Jul 2023

    जो पिन्हाँ होता है!

    हम तेरी सिखाई मंतिक़* से अपने को तो समझा लेते हैं, इक ख़ार खटकता रहता है सीने में जो पिन्हाँ होता है| *ज्ञान इब्न-ए-इंशा

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