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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 2nd Aug 2023

    कैसे मिलाता है मुझे!

    तेरा मुंकिर नहीं ऐ वक़्त मगर देखना है, बिछड़े लोगों से कहाँ कैसे मिलाता है मुझे| शहरयार

  • 2nd Aug 2023

    हौल सा आता है मुझे!

    मेरी इन आँखों को ख़्वाबों से पशेमानी है, नींद के नाम से जो हौल सा आता है मुझे| शहरयार

  • 2nd Aug 2023

    संस्मरण और एक गीत!

    मैंने अपने जीवन और सेवाकाल से संबंधित बहुत से संस्मरण पहले शेयर किए थे, उनमें से एक को आज फिर से दोहरा रहा हूँ| लगभग ढाई वर्ष के लखनऊ प्रवास और सात वर्ष के ऊंचाहार प्रवास की कुछ छिटपुट घटनाएं याद करने का प्रयास करता हूँ। अब घटनाओं की या व्यक्तियों की उस प्रकार विस्तार…

  • 1st Aug 2023

    कौन बुलाता है मुझे!

    रात का वक़्त है सूरज है मिरा राह-नुमा, देर से दूर से ये कौन बुलाता है मुझे| शहरयार

  • 1st Aug 2023

    क्या नज़र आता है मुझे!

    दिल में रखता है न पलकों पे बिठाता है मुझे, फिर भी इक शख़्स में क्या क्या नज़र आता है मुझे| शहरयार

  • 1st Aug 2023

    भटकती क्यूँ है!

    मुझ से क्या पूछ रहे हो मिरी वहशत का सबब, बू-ए-आवारा से पूछो कि भटकती क्यूँ है| शहरयार

  • 1st Aug 2023

    बात खटकती क्यूँ है!

    तुझसे मिल कर भी न तन्हाई मिटेगी मेरी, दिल में रह रह के यही बात खटकती क्यूँ है| शहरयार

  • 1st Aug 2023

    बेगाना समझती क्यूँ है!

    मुझको अपना न कहा इसका गिला तुझ से नहीं, इसका शिकवा है कि बेगाना समझती क्यूँ है| शहरयार

  • 1st Aug 2023

    धूप के क़हर का डर!

    धूप के क़हर का डर है तो दयार-ए-शब से, सर-बरहना कोई परछाईं निकलती क्यूँ है| शहरयार

  • 1st Aug 2023

    रंग बदलती क्यूँ है!

    जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है, ज़िंदगी रोज़ नए रंग बदलती क्यूँ है| शहरयार

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