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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Aug 2023

    जब भी फ़ुर्सत होती है!

    तब हम दोनों वक़्त चुरा कर लाते थे, अब मिलते हैं जब भी फ़ुर्सत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    कहते हैं हैरत होती है!

    अक्सर वो कहते हैं वो बस मेरे हैं, अक्सर क्यूँ कहते हैं हैरत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    शय की क़ीमत होती है

    ग़म होते हैं जहाँ ज़ेहानत होती है, दुनिया में हर शय की क़ीमत होती है| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    हमने फ़ाक़े झेले थे!

    ज़ेहन ओ दिल आज भूके मरते हैं, उन दिनों हमने फ़ाक़े झेले थे| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    अपने सौ झमेले थे!

    ख़ुद-कुशी क्या दुखों का हल बनती, मौत के अपने सौ झमेले थे| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    हसरतें दुकानों पर!

    थीं सजी हसरतें दुकानों पर, ज़िंदगी के अजीब मेले थे| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    आँसुओं के रेले थे!

    इक तरफ़ मोर्चे थे पलकों के, इक तरफ़ आँसुओं के रेले थे| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    दिल की गली में खेले थे

    हम तो बचपन में भी अकेले थे, सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे| जावेद अख़्तर

  • 4th Aug 2023

    शतरंज खेलो और प्रेम करो!

    श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम में मैं अभी अज्ञेय जी द्वारा संपादित सप्तकों में शामिल श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर कर रहा हूँ और इसके अंतर्गत आज मैं चौथा सप्तक में शामिल एक कवि श्री राजकुमार कुंभज जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री राजकुमार कुंभज…

  • 3rd Aug 2023

    उसको भूल जाऊँगी!

    जवाज़* ढूँड रहा था नई मोहब्बत का, वो कह रहा था कि मैं उसको भूल जाऊँगी|   *Justification परवीन शाकिर

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