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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Jul 2023

    अब अंदर जाकर देख!

    तू भी ‘मुनीर’ अब भरे जहाँ में मिल कर रहना सीख, बाहर से तो देख लिया अब अंदर जाकर देख|    मुनीर नियाज़ी

  • 31st Jul 2023

    नक़्श बना कर देख!

    शायद कोई देखने वाला हो जाए हैरान, कमरे की दीवारों पर कोई नक़्श बना कर देख| मुनीर नियाज़ी

  • 31st Jul 2023

    पास बुला कर देख!

    दरवाज़े के पास आ आ कर वापस मुड़ती चाप, कौन है इस सुनसान गली में पास बुला कर देख| मुनीर नियाज़ी

  • 31st Jul 2023

    दिया जला कर देख!

    शाम है गहरी तेज़ हवा है सर पे खड़ी है रात, रस्ता गए मुसाफ़िर का अब दिया जला कर देख| मुनीर नियाज़ी

  • 31st Jul 2023

    आँख मिला कर देख!

    तुझसे बिछड़ कर क्या हूँ मैं अब बाहर आ कर देख, हिम्मत है तो मेरी हालत आँख मिला कर देख| मुनीर नियाज़ी

  • 31st Jul 2023

    ऑक्सफोर्ड एक बार फिर!

  • 28th Jul 2023

    अन-कहे सवाल की!

    देख के मुझ को ग़ौर से फिर वो चुप से हो गए, दिल में ख़लिश है आज तक इस अन-कहे सवाल की| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Jul 2023

    उस परी-जमाल की!

    उम्र के साथ अजीब सा बन जाता है आदमी, हालत देख के दुख हुआ आज उस परी-जमाल की| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Jul 2023

    मेरे किसी ख़याल की!

    शाम झुकी थी बहर पर पागल हो कर रंग से, या तस्वीर थी ख़्वाब में मेरे किसी ख़याल की| मुनीर नियाज़ी

  • 27th Jul 2023

    दहशत थी भौंचाल की!

    शहर में डर था मौत का चाँद की चौथी रात को, ईंटों की इस खोह में दहशत थी भौंचाल की| मुनीर नियाज़ी

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