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जो कुटिलता से जियेंगे!
आज एक बार मैं हिन्दी काव्य मंचों के एक प्रमुख कवि और सांसद भी रहे स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| बैरागी जी की कविताओं में साफ़गोई और खुद्दारी की अभिव्यक्ति प्रमुखता से मिलती थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय बालकवि बैरागी जी की यह कविता – छीनकर छ्लछंद से…
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ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी!
वक़्त अच्छा भी आएगा ‘नासिर’, ग़म न कर ज़िंदगी पड़ी है अभी| नासिर काज़मी