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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Jan 2023

    पलकें बोझल रहती थीं!

    एक ये दिन जब जागी रातें दीवारों को तकती हैं, एक वो दिन जब शामों की भी पलकें बोझल रहती थीं| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    चाँद पे परियाँ रहती थीं!

    मुझको यकीं है सच कहती थी, जो भी अम्मी कहती थी, जब मेरे बचपन के दिन थे, चाँद पे परियाँ रहती थीं| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    आओ खेलें सारी गलियाँ कहती थीं!

    एक ये दिन जब सारी सड़कें रूठी रूठी लगती हैं, एक वो दिन जब आओ खेलें सारी गलियाँ कहती थीं| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    इस भरी दुनिया में है तन्हा किया!

    क्या बताऊँ कौन था जिसने मुझे, इस भरी दुनिया में है तन्हा किया| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी!

    कुछ कमी अपनी वफ़ाओं में भी थी, तुमसे क्या कहते कि तुमने क्या किया| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    ख़ैर तुमने जो किया अच्छा किया!

    बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद सी, ख़ैर तुमने जो किया अच्छा किया| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    एक इक करके उन्हें बेचा किया!

    ज़िंदगी-भर मेरे काम आए उसूल, एक इक करके उन्हें बेचा किया| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    मैंने अपना फिर सौदा किया!

    आज मैंने अपना फिर सौदा किया, और फिर मैं दूर से देखा किया| जावेद अख़्तर

  • 30th Jan 2023

    मुझको सरकार बनाने दो!

    हास्य-व्यंग्य के अपनी तरह के अनूठे कवि स्वर्गीय अल्हड़ बीकानेरी जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| अल्हड़ जी की कुछ कविताएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय अल्हड़ बीकानेरी जी की यह कविता – जो बुढ्ढे खूसट नेता हैं, उनको खड्डे में जाने दो।बस एक बार, बस…

  • 29th Jan 2023

    जो गुज़री हमें है याद सब!

    तल्ख़ियाँ कैसे न हों अशआ’र में, हम पे जो गुज़री हमें है याद सब| जावेद अख़्तर

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