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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Feb 2023

    कब हश्र मुअ’य्यन है !

    कब तक अभी रह देखें ऐ क़ामत-ए-जानाना, कब हश्र मुअ’य्यन है तुझको तो ख़बर होगी| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    यारों की किस तरह बसर होगी!

    वाइ’ज़ है न ज़ाहिद है नासेह है न क़ातिल है, अब शहर में यारों की किस तरह बसर होगी| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    कब शाम-ए-नज़र होगी!

    कब महकेगी फ़स्ल-ए-गुल कब बहकेगा मय-ख़ाना, कब सुब्ह-ए-सुख़न होगी कब शाम-ए-नज़र होगी| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    कब जान लहू होगी!

    कब जान लहू होगी कब अश्क गुहर होगा, किस दिन तिरी शुनवाई ऐ दीदा-ए-तर होगी| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    सुनते थे सहर होगी!

    कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी, सुनते थे वो आएँगे सुनते थे सहर होगी| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    सुब्ह किधर निकल गई!

    आख़िर-ए-शब के हम-सफ़र ‘फ़ैज़’ न जाने क्या हुए, रह गई किस जगह सबा सुब्ह किधर निकल गई| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    बात बदल बदल गई!

    दिल से तो हर मोआ’मला करके चले थे साफ़ हम, कहने में उनके सामने बात बदल बदल गई| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    रात मचल मचल गई!

    जब तुझे याद कर लिया सुब्ह महक महक उठी, जब तिरा ग़म जगा लिया रात मचल मचल गई| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    हिज्र की रात ढल गई!

    बज़्म-ए-ख़याल में तिरे हुस्न की शम्अ जल गई, दर्द का चाँद बुझ गया हिज्र की रात ढल गई| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 3rd Feb 2023

    दिल था कि फिर बहल गया!

    शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई, दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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