-
दिल धड़का हम समझे वो आए है!
रात के सन्नाटे में हमने क्या-क्या धोके खाए है,अपना ही जब दिल धड़का तो हम समझे वो आए है॥ क़तील शिफ़ाई
-
दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं!
तुम पूछो और में न बताउ ऐसे तो हालात नहीं,एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं॥ क़तील शिफ़ाई
-
अपने बदन से तेरी खुशबू आए!
जब तस्सवुर मेरा चुपके से तुझे छू आए,देर तक अपने बदन से तेरी खुशबू आए॥ क़तील शिफ़ाई
-
हसीन शख्स की बातों में आ गया!
सदियों का रस जगा मेरी रातों में आ गया,मैं एक हसीन शख्स की बातों में आ गया॥ क़तील शिफ़ाई
-
ये जादू नज़र आए मुझको!
सारी बस्ती में ये जादू नज़र आए मुझको,जो दरीचा भी खुले तू नज़र आए मुझको॥ क़तील शिफ़ाई
-
सब जीवन बीता जाता है!
आज फिर से मैं माँ भारती के अनूठे गौरव गायक और छायावाद युग के प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| प्रसाद जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की यह कविता– सब जीवन बीता जाता हैधूप छाँह…
-
तुंद-हवाओं में जलाए हैं चराग़!
हमने उन तुंद-हवाओं में जलाए हैं चराग़, जिन हवाओं ने उलट दी हैं बिसातें अक्सर| जाँ निसार अख़्तर
-
कभी चेहरे भी पढ़े हैं तुमने!
उनसे पूछो कभी चेहरे भी पढ़े हैं तुमने, जो किताबों की किया करते हैं बातें अक्सर| जाँ निसार अख़्तर
-
जान के खा लेते हैं मातें अक्सर!
हमसे इक बार भी जीता है न जीतेगा कोई, वो तो हम जान के खा लेते हैं मातें अक्सर| जाँ निसार अख़्तर
-
लुटती हुई देखी हैं बरातें अक्सर!
इश्क़ रहज़न न सही इश्क़ के हाथों फिर भी, हमने लुटती हुई देखी हैं बरातें अक्सर| जाँ निसार अख़्तर