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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Aug 2023

    उससे लिपट के रो लेते!

    दुखों का बोझ अकेले नहीं सँभलता है, कहीं वो मिलता तो उससे लिपट के रो लेते| बशीर बद्र

  • 11th Aug 2023

    तन्हाइयों में रो लेते!

    किसी की याद में पलकें ज़रा भिगो लेते, उदास रात की तन्हाइयों में रो लेते| बशीर बद्र

  • 11th Aug 2023

    वही दीवार जिसे!

    सुब्ह होते ही उभर आती है सालिम होकर, वही दीवार जिसे रोज़ मैं मिस्मार करूँ|    निदा फ़ाज़ली

  • 11th Aug 2023

    न बादल न हवा!

    मिरे क़ब्ज़े में न मिट्टी है न बादल न हवा, फिर भी चाहत है कि हर शाख़ समर-बार करूँ| निदा फ़ाज़ली

  • 11th Aug 2023

    दर-ओ-दीवार करूँ!

    पहले सोचूँ उसे फिर उसकी बनाऊँ तस्वीर, और फिर उसमें ही पैदा दर-ओ-दीवार करूँ| निदा फ़ाज़ली

  • 11th Aug 2023

    प्रेयसी!

    श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम में एक बार फिर से मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की कविता शेयर कर रहा हूँ| निराला जी की कृति – ‘राम की शक्ति पूजा’  अपने आप में एक अमर रचना है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सूर्यकांत त्रिपाठी निराला…

  • 11th Aug 2023

    जीत से इंकार करूँ!

    सामने तेरे करूँ हार का अपनी एलान, और अकेले में तिरी जीत से इंकार करूँ| निदा फ़ाज़ली

  • 10th Aug 2023

    तिरा दीदार करूँ!

    तू क़रीब आए तो क़ुर्बत का यूँ इज़हार करूँ, आइना सामने रख कर तिरा दीदार करूँ| निदा फ़ाज़ली

  • 10th Aug 2023

    मेरे लिए जगह करो!

    मेरी नशिस्त पे भी कल आएगा कोई दूसरा, तुम भी बना के रास्ता मेरे लिए जगह करो| निदा फ़ाज़ली

  • 10th Aug 2023

    न कहे सुना करो!

    दिल में जिसे बसाओ तुम चाँद उसे बनाओ तुम, वो जो कहे पढ़ा करो जो न कहे सुना करो| निदा फ़ाज़ली

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