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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Mar 2023

    वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा!

    उस शाम वो रुख़्सत का समाँ याद रहेगा, वो शहर वो कूचा वो मकाँ याद रहेगा| इब्न-ए-इंशा

  • 19th Mar 2023

    ओ मेरी जिंदगी!

    एक बार फिर से मैं आज हिन्दी के अनूठे कवि स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| आपातकाल में अपनी विद्रोही ग़ज़लों से उनको बहुत प्रसिद्धि प्राप्त हुई थी| दुष्यंत जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की यह कविता…

  • 18th Mar 2023

    ज़रा आवाज़ देना राज़दारो!

    न जाने किसका साया दिल से गुज़रा, ज़रा आवाज़ देना राज़दारो| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    लचकती डालियो तुम फूल वारो!

    सजाओ कोई कजरा लाओ गजरा, लचकती डालियो तुम फूल वारो| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    तुम्हीं को दोष दूँगी ऐ नज़ारो!

    तुम्हीं से दिल ने सीखा है तड़पना, तुम्हीं को दोष दूँगी ऐ नज़ारो| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    कोई आए कहीं से यूँ पुकारो!

    बहारो मेरा जीवन भी सँवारो, कोई आए कहीं से यूँ पुकारो| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    हवा ने बुझाए हैं क्या क्या!

    कहीं अँधेरे से मानूस हो न जाए अदब, चराग़ तेज़ हवा ने बुझाए हैं क्या क्या| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    दीवाने आए हैं क्या क्या!

    उठा के सर मुझे इतना तो देख लेने दे, कि क़त्ल-गाह में दीवाने आए हैं क्या क्या| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    धूप ने तलवे जलाए हैं क्या क्या!

    छटा जहाँ से उस आवाज़ का घना बादल, वहीं से धूप ने तलवे जलाए हैं क्या क्या| कैफ़ी आज़मी

  • 18th Mar 2023

    ज़ख़्म- मुस्कुराए हैं क्या क्या!

    जब उसने हार के ख़ंजर ज़मीं पे फेंक दिया, तमाम ज़ख़्म-ए-जिगर मुस्कुराए हैं क्या क्या| कैफ़ी आज़मी

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