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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Apr 2023

    रंगत बदल चली है!

    अश्क ख़ूनाब हो चले हैं, ग़म की रंगत बदल चली है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    हालत सँभल चली है!

    बात बस से निकल चली है, दिल की हालत सँभल चली है| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    गुनाहगार चले गए!

    न रहा जुनून-ए-रुख़-ए-वफ़ा ये रसन ये दार करोगे क्या, जिन्हें जुर्म-ए-इश्क़ पे नाज़ था वो गुनाहगार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    बज़्म-ए-यार चले गए!

    ये हमीं थे जिनके लिबास पर सर-ए-रह सियाही लिखी गई, यही दाग़ थे जो सजा के हम सर-ए-बज़्म-ए-यार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    सभी इख़्तियार चले गए

    न सवाल-ए-वस्ल न अर्ज़-ए-ग़म न हिकायतें न शिकायतें, तिरे अहद में दिल-ए-ज़ार के सभी इख़्तियार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    ग़म-गुसार चले गए!

    तिरी कज-अदाई* से हार के शब-ए-इंतिज़ार चली गई, मिरे ज़ब्त-ए-हाल से रूठ कर मिरे ग़म-गुसार चले गए| *बेवफाई फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    जाँ-निसार चले गए!

    तिरे ग़म को जाँ की तलाश थी तिरे जाँ-निसार चले गए, तिरी रह में करते थे सर तलब सर-ए-रहगुज़ार चले गए| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

  • 9th Apr 2023

    मौज!

    आज शायद पहली बार मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ हिन्दी के वरिष्ठ कवि स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक कविता| शास्त्री जी को अनेक साहित्यिक सम्मान प्राप्त हुए थे तथा पद्मश्री सम्मान भी सरकार की तरफ से प्रदान किया जा रहा था, जिसे उन्होंने स्वीकार नहीं किया था| उन्होंने संस्कृत में भी अनेक रचनाएं लिखी…

  • 8th Apr 2023

    धड़कने की सदा याद!

    मुद्दत हुई इक हादसा-ए-इश्क़ को लेकिन, अब तक है तिरे दिल के धड़कने की सदा याद| जिगर मुरादाबादी

  • 8th Apr 2023

    अब तक है वो नग़्मा!

    छेड़ा था जिसे पहले-पहल तेरी नज़र ने, अब तक है वो इक नग़्मा-ए-बे-साज़-ओ-सदा याद| जिगर मुरादाबादी

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