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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Oct 2023

    सुब्ह की वीरानी में!

    हिज्र में शब भर दर्द-ओ-तलब के चाँद सितारे साथ रहे, सुब्ह की वीरानी में यारो कैसे बसर औक़ात करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

  • 6th Oct 2023

    लहू अपनी गर्दन पे!

    क़त्ल-ए-दिल-ओ-जाँ अपने सर है अपना लहू अपनी गर्दन पे, मोहर-ब-लब बैठे हैं किस का शिकवा किस के साथ करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

  • 6th Oct 2023

    रौशन अपनी रात करें!

    शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह* ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ** रौशन की, घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें| *नशे की उमंग , **मुकाबला करने वाले फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

  • 6th Oct 2023

    दर्द थमे तो बात करें!

    अब जो कोई पूछे भी तो उससे क्या शरह-ए-हालात करें, दिल ठहरे तो दर्द सुनाएँ दर्द थमे तो बात करें| फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

  • 6th Oct 2023

    मिटने का खेल!

    आज फिर से मैं छायावाद युग में ही रहते हुए, छायावाद युग को प्रसिद्ध कवियित्री स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ|  महादेवी जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय महादेवी वर्मा जी का यह गीत – मैं अनन्त पथ में लिखती जोसस्मित…

  • 5th Oct 2023

    ज़मीर की आवाज़!

    सुन के अपने ज़मीर की आवाज़, ख़ुद को क्यूँ शर्मसार कर लिया जाए|    राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    संगसार कर लिया जाए

    पत्थर औरों पे अब नहीं उठते, ख़ुद को ही संगसार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    पार कर लिया जाए!

    अश्क आँखों में फिर उमड आए, इस नदी को भी पार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    दुश्मनों को भी!

    अब तो लगता है दुश्मनों को भी, दोस्तों में शुमार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

  • 5th Oct 2023

    शर्मसार कर लिया जाए

    सोच कर इस जहाँ के बारे में, ख़ुद को क्यूँ शर्मसार कर लिया जाए| राजेश रेड्डी

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