रौशन अपनी रात करें!

शाम हुई फिर जोश-ए-क़दह* ने बज़्म-ए-हरीफ़ाँ** रौशन की,

घर को आग लगाएँ हम भी रौशन अपनी रात करें|

*नशे की उमंग , **मुकाबला करने वाले

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ 

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