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मेरी राह मत रोको!
आज एक बार फिर से मैं अपने समय में काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले कवि स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| निर्धन जी का काव्य प्रस्तुति का अपना ही अलग अंदाज़ था, उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय शिशुपाल…
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उदासी से भर गए होते
बहुत दिनों से है दिल अपना ख़ाली ख़ाली सा, ख़ुशी नहीं तो उदासी से भर गए होते| बशीर बद्र