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आँखों से टूट कर आँसू
ज़मीं पर आ गए आँखों से टूट कर आँसू, बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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ज़मीं पर इक सूरज!
लहू-लुहान पड़ा था ज़मीं पर इक सूरज, परिंदे अपने परों से हवाएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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दिन प्रतिदिन वह आता है – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…
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बीमारियों के सौदागर
तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर, ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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अभिनेता!
प्रसिद्ध हिन्दी व्यंग्यकार स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| एक कुशल व्यंग्यकार होने के अलावा त्यागी जी ने काफी अच्छी कविताएं भी लिखी हैं, उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता – बातों का खो गया…