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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th May 2023

    आँखों से टूट कर आँसू

    ज़मीं पर आ गए आँखों से टूट कर आँसू, बुरी ख़बर है फ़रिश्ते ख़ताएँ करने लगे| राहत इंदौरी

  • 19th May 2023

    ज़मीं पर इक सूरज!

    लहू-लुहान पड़ा था ज़मीं पर इक सूरज, परिंदे अपने परों से हवाएँ करने लगे| राहत इंदौरी

  • 19th May 2023

    दिन प्रतिदिन वह आता है – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 18th May 2023

    बीमारियों के सौदागर

    तरक़्क़ी कर गए बीमारियों के सौदागर, ये सब मरीज़ हैं जो अब दवाएँ करने लगे| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    दुआएँ करने लगे!

    अंधेरे चारों तरफ़ साएँ साएँ करने लगे, चराग़ हाथ उठा कर दुआएँ करने लगे| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    सैलाब सा है आँखों में

    क्यूँ ये सैलाब सा है आँखों में, मुस्कुराए थे हम-ख़याल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    ज़मीं थी मेरे नाम!

    वो जो दो-गज़ ज़मीं थी मेरे नाम, आसमाँ की तरफ़ उछाल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    बोला है कोई आईना

    झूट बोला है कोई आईना, वर्ना पत्थर में कैसे बाल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    न ये कमाल आया!

    ज़िंदगी किस तरह गुज़ारते हैं, ज़िंदगी भर न ये कमाल आया| राहत इंदौरी

  • 18th May 2023

    अभिनेता!

    प्रसिद्ध हिन्दी व्यंग्यकार स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की एक कविता आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| एक कुशल व्यंग्यकार होने के अलावा त्यागी जी ने काफी अच्छी कविताएं भी लिखी हैं, उनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रवीन्द्रनाथ त्यागी जी की यह कविता  – बातों का खो गया…

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