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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Dec 2023

    सूरज को एक झोंका!

    इस हादसे को सुन के करेगा यक़ीं कोई, सूरज को एक झोंका हवा का बुझा गया|     शहरयार

  • 5th Dec 2023

    आगे चला गया!

    मैं जिस्म के हिसार में महसूर हूँ अभी, वो रूह की हदों से भी आगे चला गया| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    मिरा दिल दुखा गया!

    क्यूँ आज उसका ज़िक्र मुझे ख़ुश न कर सका, क्यूँ आज उसका नाम मिरा दिल दुखा गया| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    मेरे लहू से लिखा गया!

    किस किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया, ग़ैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    जो हादिसा नहीं!

    न जाने क्यूँ मुझे लगता है ऐसा हाकिम-ए-शहर, जो हादिसा नहीं पहले हुआ वो अब होगा| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    क्या ग़ज़ब होगा!

    कोई नहीं है जो बतलाए मेरे लोगों को, हवा के रुख़ के बदलने से क्या ग़ज़ब होगा| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    ये एक शब होगा!

    मकाँ तो होंगे मकीनों से सब मगर ख़ाली, यहाँ भी देखूँ तमाशा ये एक शब होगा| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    मिथिला!

    आज एक बार मैं  ओज और प्रेम दोनों क्षेत्रों में अमर रचनाएं देने वाले   राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर  जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| यह रचना उन्होंने ऐतिहासिक महत्व वाली पावन नगरी ‘मिथिला’ के बारे में है| दिनकर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…

  • 4th Dec 2023

    इसी उमीद पे कब से!

    इसी उमीद पे कब से धड़क रहा है दिल, तिरे हुज़ूर किसी रोज़ ये तलब होगा| शहरयार 

  • 4th Dec 2023

    यूँ तो सब होगा!

    जहाँ में होने को ऐ दोस्त यूँ तो सब होगा, तिरे लबों पे मिरे लब हों ऐसा कब होगा| शहरयार

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