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अन्वेषण!
आज मैं हिन्दी कविता की पुरानी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवि स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| त्रिपाठी जी की कुछ कविताएं आज भी बहुत लोकप्रिय हैं, जैसे यह प्रार्थना- ‘हे प्रभो आनंददाता ज्ञान हमको दीजिए’| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय स्वर्गीय रामनरेश त्रिपाठी जी जी की यह कविता – मैं…
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काएँ काएँ करने लगे!
अजीब रंग था मज्लिस का ख़ूब महफ़िल थी, सफ़ेद पोश उठे काएँ काएँ करने लगे| राहत इंदौरी
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इल्तिजाएँ करने लगे!
झुलस रहे हैं यहाँ छाँव बाँटने वाले, वो धूप है कि शजर इल्तिजाएँ करने लगे| राहत इंदौरी