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अंधेरे का मुसाफिर!
आज मैं अपने समय के श्रेष्ठ कवि और दिनमान पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता – यह सिमटती साँझ,यह वीरान जंगल का…