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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 7th Jun 2023

    किसको झाँका चाँद!

    बरगद की इक शाख़ हटाकर, जाने किसको झाँका चाँद| परवीन शाकिर

  • 7th Jun 2023

    किसको सोचा चाँद!

    जब पानी में चेहरा देखा, तूने किसको सोचा चाँद| परवीन शाकिर

  • 7th Jun 2023

    सूरज का है साया चाँद!

    इतने रौशन चेहरे पर भी, सूरज का है साया चाँद| परवीन शाकिर

  • 7th Jun 2023

    आँसू रोके नूर नहाए!

    आँसू रोके नूर नहाए, दिल दरिया तन सहरा चाँद| परवीन शाकिर 

  • 7th Jun 2023

    कितना तन्हा होगा चाँद

    इतने घने बादल के पीछे, कितना तन्हा होगा चाँद| परवीन शाकिर

  • 7th Jun 2023

    अंधेरे का मुसाफिर!

    आज मैं अपने समय के श्रेष्ठ कवि और दिनमान पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  सर्वेश्वर जी की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वरदयाल सक्सेना जी की यह कविता – यह सिमटती साँझ,यह वीरान जंगल का…

  • 6th Jun 2023

    देख रहा है भोला चाँद!

    मेरे मुँह को किस हैरत से, देख रहा है भोला चाँद| परवीन शाकिर

  • 6th Jun 2023

    कितना कच्चा चाँद!

    मेरी करवट पर जाग उठ्ठे, नींद का कितना कच्चा चाँद| परवीन शाकिर

  • 6th Jun 2023

    घूम रहा है तन्हा चाँद

    यादों की आबाद गली में, घूम रहा है तन्हा चाँद| परवीन शाकिर

  • 6th Jun 2023

    सहमा सहमा चाँद!

    किस मक़्तल से गुज़रा होगा, इतना सहमा सहमा चाँद| परवीन शाकिर

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