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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 8th Jun 2023

    अफ़्साने हज़ारों हैं!

    इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं, इन आँखों से वाबस्ता अफ़्साने हज़ारों हैं| शहरयार

  • 8th Jun 2023

    ये न सोचा हमने!

    उम्र भर सच ही कहा सच के सिवा कुछ न कहा, अज्र क्या इसका मिलेगा ये न सोचा हमने| शहरयार

  • 8th Jun 2023

    ख़्वाब न देखा हमने!

    कौन सा क़हर ये आँखों पे हुआ है नाज़िल, एक मुद्दत से कोई ख़्वाब न देखा हमने| शहरयार

  • 8th Jun 2023

    क्या ख़ूब निभाया हमने!

    ख़ुद पशीमान हुए न उसे शर्मिंदा किया, इश्क़ की वज़्अ को क्या ख़ूब निभाया हमने| शहरयार

  • 8th Jun 2023

    शिकवा किया तन्हा!

    सब का अहवाल वही है जो हमारा है आज, ये अलग बात कि शिकवा किया तन्हा हमने| शहरयार

  • 8th Jun 2023

    देख ली दुनिया हमने!

    जुस्तुजू जिसकी थी उस को तो न पाया हमने, इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने| शहरयार

  • 8th Jun 2023

     अंधेरे का मुसाफिर!

    आज एक बार फिर से मैं अपनी तरह के अनूठे  कवि स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  भवानी दादा की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भवानीप्रसाद मिश्र जी की यह कविता, जिसमें उन्होंने मृत्यु का उल्लेख अपने अलग अंदाज़ में किया है…

  • 7th Jun 2023

    पत्तों के झुरमुट पर!

    सूखे पत्तों के झुरमुट पर, शबनम थी या नन्हा चाँद| परवीन शाकिर

  • 7th Jun 2023

    देख रहा है सपना चाँद!

    रात के शाने पर सर रक्खे, देख रहा है सपना चाँद| परवीन शाकिर

  • 7th Jun 2023

    बादल के रेशम झूले में!

    बादल के रेशम झूले में, भोर समय तक सोया चाँद| परवीन शाकिर

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