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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Jun 2023

    वो पयाम किसका था!

    हमारे ख़त के तो पुर्ज़े किए पढ़ा भी नहीं, सुना जो तू ने ब-दिल वो पयाम किसका था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    रह गई मुश्ताक़!

    तमाम बज़्म जिसे सुन के रह गई मुश्ताक़, कहो वो तज़्किरा-ए-ना-तमाम किस का था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    एहतिमाम किसका था!

    न पूछ-गछ थी किसी की वहाँ न आव-भगत, तुम्हारी बज़्म में कल एहतिमाम किसका था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    मक़ाम किसका था!

    रहा न दिल में वो बेदर्द और दर्द रहा, मुक़ीम कौन हुआ है मक़ाम किसका था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    ये कलाम किसका था!

    वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे, तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किसका था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    ये काम किसका था!

    वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं, ये काम किसने किया है ये काम किसका था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    वो नाम किसका था!

    तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था, न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था| दाग़ देहलवी

  • 9th Jun 2023

    तुम जलाकर दिये !

    आज एक बार फिर से मैं अपने समय में  काव्य मंचों के एक लोकप्रिय कवि रहे स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ|  नेपाली जी  की कुछ रचनाएँ मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की यह कविता – तुम जलाकर दिये,…

  • 8th Jun 2023

    परवाने हज़ारों हैं!

    इस शम-ए-फ़रोज़ाँ को आँधी से डराते हो, इस शम-ए-फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं|    शहरयार

  • 8th Jun 2023

    मय-ख़ाने हज़ारों हैं!

    इक सिर्फ़ हमीं मय को आँखों से पिलाते हैं, कहने को तो दुनिया में मय-ख़ाने हज़ारों हैं| शहरयार

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