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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th Aug 2023

    चटानों में दबा दी जाए!

    दिल का वो हाल हुआ है ग़म-ए-दौराँ के तले, जैसे इक लाश चटानों में दबा दी जाए| जाँ निसार अख़्तर

  • 9th Aug 2023

    जीवन-डाली से!

    श्रेष्ठ कवियों की कविताएं शेयर करने के क्रम में एक बार फिर से मैं छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की कविता शेयर कर रहा हूँ| पंत जी को प्रकृति के सुकुमार कवि भी कहा जाता है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की यह कविता – झर पड़ता…

  • 8th Aug 2023

    ये रस्म उठा दी जाए!

    जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए, है यही रस्म तो ये रस्म उठा दी जाए| जाँ निसार अख़्तर

  • 8th Aug 2023

    तो कुछ बात बनेगी!

    ये क्या है कि बढ़ते चलो बढ़ते चलो आगे, जब बैठ के सोचेंगे तो कुछ बात बनेगी| जाँ निसार अख़्तर 

  • 8th Aug 2023

    न तिरे साथ बनेगी!

    ये हमसे न होगा कि किसी एक को चाहें, ऐ इश्क़ हमारी न तिरे साथ बनेगी| जाँ निसार अख़्तर

  • 8th Aug 2023

    कुछ और तो क्या!

    ऐ नावक-ए-ग़म दिल में है इक बूँद लहू की, कुछ और तो क्या हम से मुदारात बनेगी| जाँ निसार अख़्तर

  • 8th Aug 2023

    आख़िर कोई तक़रीब!

    उनसे यही कह आएँ कि अब हम न मिलेंगे, आख़िर कोई तक़रीब-ए-मुलाक़ात बनेगी| जाँ निसार अख़्तर

  • 8th Aug 2023

    रात की औक़ात बनेगी!

    सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी, तुम आए तो इस रात की औक़ात बनेगी| जाँ निसार अख़्तर

  • 8th Aug 2023

    ओ2 और ईस्ट हैम!

    लंदन में पहले की गई यात्राओं की तरह इस बार के प्रवास में भी पिछले सप्ताहांत में हमने इन दो स्थानों का भ्रमण किया| ओ2 तो ऐसा मान सकते हैं हमारे यहाँ से नदी पार ही है, जैसा किसी ज़माने में मेरे लिए शाहदरा से दिल्ली आना होता था| वहाँ यमुना नदी थी, जिस पर…

  • 7th Aug 2023

    गुनाहगार चले!

    मिली है शम्अ‘ से ये रस्म-ए-आशिक़ी हमको, गुनाह हाथ पे ले कर गुनाहगार चले|     गुलज़ार

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