ओ2 और ईस्ट हैम!

लंदन में पहले की गई यात्राओं की तरह इस बार के प्रवास में भी पिछले सप्ताहांत में हमने इन दो स्थानों का भ्रमण किया| ओ2 तो ऐसा मान सकते हैं हमारे यहाँ से नदी पार ही है, जैसा किसी ज़माने में मेरे लिए शाहदरा से दिल्ली आना होता था| वहाँ यमुना नदी थी, जिस पर उस समय एकमात्र लोहे का पुल था, जिस पर लंबा जाम लगा करता था| यहाँ हम लंदन के कैनरी व्हार्फ में जुबली लाइन के अंडरग्राउंड स्टेशन की बगल में हैं और यह ट्रेन भूमिगत सुरंग के माध्यम से थेम्स नदी के नीचे होकर उसके उस पार स्थित अगले स्टेशन नॉर्थ ग्रीनविच उतारती है, जिसके बगल में ही ओ2 स्थित है| आगे बताने से पहले बता दूँ कि यहाँ हमारी बगल में ही तीन अलग-अलग  रेल सेवाओं के स्टेशन  हैं, जिनमें से दो अंडरग्राउंड सेवाएं हैं- ‘जुबली लाइन’ और एक जो पिछली यात्रा के समय नहीं थी, वह है- ‘एलिज़ाबेथ लाइन’| इसके अलावा एक लाइन ‘डीएलआर’ इस इलाके में ओवरग्राउंड है, आगे जाकर अंडरग्राउंड भी चलती है, इस सेवा के लाल डिब्बे घर से ही सामने दिखाई देते हैं और इनकी कुछ आवाज़ भी सुनाई देती है| बाकी दोनों सेवाओं का तो स्टेशन जाने पर ही पता चलता है|

हाँ तो पिछले शनिवार को हम लोग ओ2 गए जो कि एक अति आकर्षक और भव्य शॉपिंग सेंटर और ईवेंट प्लेस है| यहाँ पिछली दो बार की तरह हमने ‘जिमी रेस्टोरेंट में भोजन भी किया जहां अन्य स्थानों के साथ ही भारतीय भोजन की भी भरपूर व्यवस्था है और आप बुफ़े सिस्टम के माध्यम से पेट और मन भरकर विविध व्यंजनों का आनंद ले सकते हैं|

यहाँ आकर खरीदारी न करें ऐसा भी नहीं हो सकता, अतः परिवार के लोगों ने आवश्यकताओं के अनुसार खरीदारी भी की, जिनमें कई जोड़ी जूते भी शामिल थे| इस आकर्षक और विशाल परिसर में घूमना, यहाँ की सुंदर दुकानों और परिवेश को देखना अपने आप में एक अलग अनुभव है| इस परिसर की बगल में ही ‘एमिरेट्स केबल कार’ की सेवा संचालित होती है, जहां आकाश मार्ग से आप लंदन की खूबसूरती को देख सकते हैं| इन सभी के बारे में मैंने अपनी पुरानी ब्लॉग पोस्ट में विस्तार से लिखा है|

रविवार के दिन हम ‘ईस्ट हैम’ में गए, यहाँ भी हम अपनी हर यात्रा में जाते हैं| लंदन के कुछ इलाके ऐसे हैं जहाँ जाकर अंग्रेजों को भी ऐसा लगता होगा कि वे शायद भारत में आ गए हैं, ईस्ट हैम भी ऐसा ही इलाका है| सभी दुकानों के भारतीय नाम, सब जगह भारतीय रुचि और आदतों के अनुकूल सामग्री| हमने यहाँ एक बार फिर ‘टेस्ट ऑफ इंडिया’ नामक रेस्टोरेंट में भोजन किया, जहां बहुत बड़े आकार का पटूरा, डोसा आदि पूरा समाप्त करना भी एक चुनौती होता है| खाने वालों और खिलाने वालों में भारतीयों की भरमार होती है और दोनों ही श्रेणियों में कभी कोई अंग्रेज भी दिख जाता है| वैसे मैं बता दूँ कि जब मैं भारतीय कहता हूँ तब उसमें पाकिस्तानी, बांग्ला देशी और कुछ हद तक श्रीलंकाई भी शामिल होंगे, क्योंकि यहाँ उनमें कोई भेद करना मुश्किल है|

यहाँ से हमने घरेलू जरूरतों के अलावा खाद्य सामग्री की खरीद भी एक दुकान से की, जहां भारतीयों के मतलब की सभी सामग्री उपलब्ध थी|

इन दोनों स्थानों के बारे में मेरा पहला अनुभव विस्तार से पुरानी ब्लॉग पोस्ट में देखा जा सकता है|

 आज के लिए इतना ही,

नमस्कार|

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