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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 6th Dec 2023

    सुब्ह का तारा होता है!

    कटने लगीं रातें आँखों में देखा नहीं पलकों पर अक्सर, या शाम-ए-ग़रीबाँ का जुगनू या सुब्ह का तारा होता है| इब्न-ए-इंशा

  • 6th Dec 2023

    उनका इशारा होता है!

    हम उनसे अगर मिल बैठे हैं क्या दोष हमारा होता है, कुछ अपनी जसारत होती है कुछ उनका इशारा होता है| इब्न-ए-इंशा

  • 6th Dec 2023

    तुम तूफ़ान समझ पाओगे!

    आज एक बार मैं  हिन्दी गीत की पहचान बने, अनेक अमर गीत देने वाले   स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत – तुम तूफ़ान समझ पाओगे? गीले बादल,…

  • 5th Dec 2023

    सूरज को एक झोंका!

    इस हादसे को सुन के करेगा यक़ीं कोई, सूरज को एक झोंका हवा का बुझा गया|     शहरयार

  • 5th Dec 2023

    आगे चला गया!

    मैं जिस्म के हिसार में महसूर हूँ अभी, वो रूह की हदों से भी आगे चला गया| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    मिरा दिल दुखा गया!

    क्यूँ आज उसका ज़िक्र मुझे ख़ुश न कर सका, क्यूँ आज उसका नाम मिरा दिल दुखा गया| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    मेरे लहू से लिखा गया!

    किस किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया, ग़ैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    जो हादिसा नहीं!

    न जाने क्यूँ मुझे लगता है ऐसा हाकिम-ए-शहर, जो हादिसा नहीं पहले हुआ वो अब होगा| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    क्या ग़ज़ब होगा!

    कोई नहीं है जो बतलाए मेरे लोगों को, हवा के रुख़ के बदलने से क्या ग़ज़ब होगा| शहरयार

  • 5th Dec 2023

    ये एक शब होगा!

    मकाँ तो होंगे मकीनों से सब मगर ख़ाली, यहाँ भी देखूँ तमाशा ये एक शब होगा| शहरयार

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