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सुब्ह का तारा होता है!
कटने लगीं रातें आँखों में देखा नहीं पलकों पर अक्सर, या शाम-ए-ग़रीबाँ का जुगनू या सुब्ह का तारा होता है| इब्न-ए-इंशा
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उनका इशारा होता है!
हम उनसे अगर मिल बैठे हैं क्या दोष हमारा होता है, कुछ अपनी जसारत होती है कुछ उनका इशारा होता है| इब्न-ए-इंशा
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तुम तूफ़ान समझ पाओगे!
आज एक बार मैं हिन्दी गीत की पहचान बने, अनेक अमर गीत देने वाले स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी का यह गीत – तुम तूफ़ान समझ पाओगे? गीले बादल,…
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मिरा दिल दुखा गया!
क्यूँ आज उसका ज़िक्र मुझे ख़ुश न कर सका, क्यूँ आज उसका नाम मिरा दिल दुखा गया| शहरयार
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मेरे लहू से लिखा गया!
किस किस तरह से मुझ को न रुस्वा किया गया, ग़ैरों का नाम मेरे लहू से लिखा गया| शहरयार
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जो हादिसा नहीं!
न जाने क्यूँ मुझे लगता है ऐसा हाकिम-ए-शहर, जो हादिसा नहीं पहले हुआ वो अब होगा| शहरयार
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क्या ग़ज़ब होगा!
कोई नहीं है जो बतलाए मेरे लोगों को, हवा के रुख़ के बदलने से क्या ग़ज़ब होगा| शहरयार