Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 11th Dec 2023

    आख़िरी पहर आए!

    चंद लम्हे जो लौट कर आए, रात के आख़िरी पहर आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    इल्ज़ाम मेरे सर आए!

    चाँद जितने भी गुम हुए शब के, सब के इल्ज़ाम मेरे सर आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    जो लौट कर आए!

    अपना मेहवर* बदल चुकी थी ज़मीं, हम ख़ला** से जो लौट कर आए| *धुरी, **अंतरिक्ष गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    डूबते नज़र आए!

    जब भी आँखों में अश्क भर आए, लोग कुछ डूबते नज़र आए| गुलज़ार

  • 11th Dec 2023

    कितना चौड़ा पाट नदी का!

    आज एक बार मैं  हिन्दी के श्रेष्ठ कवि और दिनमान पत्रिका के संपादन से जुड़े रहे  स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| सर्वेश्वर जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह कविता – कितना चौड़ा…

  • 10th Dec 2023

    दर्द के गीत गा सके!

    अहल-ए-ज़बाँ तो हैं बहुत कोई नहीं है अहल-ए-दिल, कौन तिरी तरह ‘हफ़ीज़’ दर्द के गीत गा सके|      हफ़ीज़ जालंधरी

  • 10th Dec 2023

    जा के उन्हें सुना सके!

    ऐसा हो कोई नामा-बर बात पे कान धर सके, सुन के यक़ीन कर सके जा के उन्हें सुना सके| हफ़ीज़ जालंधरी

  • 10th Dec 2023

    हमसे नज़र मिला सके!

    शौक़-ए-विसाल है यहाँ लब पे सवाल है यहाँ, किसकी मजाल है यहाँ हम से नज़र मिला सके| हफ़ीज़ जालंधरी

  • 10th Dec 2023

    लब न मगर हिला सके!

    रौनक़-ए-बज़्म बन गए लब पे हिकायतें रहीं, दिल में शिकायतें रहीं लब न मगर हिला सके| हफ़ीज़ जालंधरी

  • 10th Dec 2023

    जोश में आ चुके थे हम

    होश में आ चुके थे हम जोश में आ चुके थे हम, बज़्म का रंग देख कर सर न मगर उठा सके| हफ़ीज़ जालंधरी

←Previous Page
1 … 674 675 676 677 678 … 1,399
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar