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मुझे क्या मलाल है!
घर से चला तो दिल के सिवा पास कुछ न था, क्या मुझसे खो गया है मुझे क्या मलाल है| जावेद अख़्तर
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नई उमरिया प्यासी है!
आज एक बार मैं अपने समय में हिन्दी काव्य मंचों पर धूम मचाने वाले श्रेष्ठ गीतकार स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी का यह गीत – घनश्याम कहाँ…
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ये क्या मेरा हाल है!
मैं ख़ुद भी सोचता हूँ ये क्या मेरा हाल है, जिसका जवाब चाहिए वो क्या सवाल है| जावेद अख़्तर
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हम ठहरे बंजारे लोग!
इस नगरी में क्यूँ मिलती है रोटी सपनों के बदले, जिनकी नगरी है वो जानें हम ठहरे बंजारे लोग| जावेद अख़्तर
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कैसे प्यारे प्यारे लोग!
नेकी इक दिन काम आती है हमको क्या समझाते हो, हमने बे-बस मरते देखे कैसे प्यारे प्यारे लोग| जावेद अख़्तर
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साँसों के इक्तारे लोग!
वक़्त सिंघासन पर बैठा है अपने राग सुनाता है, संगत देने को पाते हैं साँसों के इक्तारे लोग| जावेद अख़्तर
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धीरे धीरे हारे लोग!
जीवन जीवन हमने जग में खेल यही होते देखा, धीरे धीरे जीती दुनिया धीरे धीरे हारे लोग| जावेद अख़्तर
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कैसे हैं बेचारे लोग!
दुख के जंगल में फिरते हैं कब से मारे मारे लोग, जो होता है सह लेते हैं कैसे हैं बेचारे लोग| जावेद अख़्तर
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ट्रेन की पटरियाँ
आज एक बार मैं हिन्दी के श्रेष्ठ गीतकार और वरिष्ठ कवि श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री सोम ठाकुर जी का यह गीत – ट्रेन की पटरियाँकह रही है कथाएक आवारगी से जुड़ी…