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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Dec 2023

    इक ज़माना गुज़र गया!

    वो तुम्हारा कहना कि जाएँगे अगर आ सके तो फिर आएँगे, उसे इक ज़माना गुज़र गया तुम्हें याद हो कि न याद हो|                   नज़ीर बनारसी

  • 18th Dec 2023

    याद हो कि न याद हो!

    हुए मुझ से जिस घड़ी तुम जुदा तुम्हें याद हो कि न याद हो, मिरी हर नज़र थी इक इल्तिजा तुम्हें याद हो कि न याद हो|                   नज़ीर बनारसी

  • 18th Dec 2023

    और जवानी में!

    इस तरह गुज़रा है बचपन कि खिलौने न मिले, और जवानी में बुढ़ापे से मुलाक़ात हुई|            मंज़र भोपाली

  • 18th Dec 2023

    किरण के पाँव!

    आज एक बार मैं मेरे अत्यंत प्रिय हिन्दी के श्रेष्ठ नवगीतकार स्वर्गीय रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| रंजक जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय रमेश रंजक जी का यह नवगीत – दे दो सवेरे को क़दमटूटे अँधेरे का अहम्निर्दोष दीपक…

  • 17th Dec 2023

    मौक़ा था वहीं मात हुई!

    इसी होनी को तो क़िस्मत का लिखा कहते हैं, जीतने का जहाँ मौक़ा था वहीं मात हुई|               मंज़र भोपाली  

  • 17th Dec 2023

    ख़ुद से मुलाक़ात हुई!

    कोई हसरत कोई अरमाँ कोई ख़्वाहिश ही न थी, ऐसे आलम में मिरी ख़ुद से मुलाक़ात हुई|               मंज़र भोपाली

  • 17th Dec 2023

    दिन भी डूबा कि नहीं!

    दिन भी डूबा कि नहीं ये मुझे मालूम नहीं, जिस जगह बुझ गए आँखों के दिए रात हुई|               मंज़र भोपाली

  • 17th Dec 2023

    टूट के बरसात हुई!

    आँख भर आई किसी से जो मुलाक़ात हुई, ख़ुश्क मौसम था मगर टूट के बरसात हुई|               मंज़र भोपाली

  • 17th Dec 2023

    चैन क्यूँ नहीं पड़ता!

    ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता, एक ही शख़्स था जहान में क्या|           जौन एलिया

  • 17th Dec 2023

    आसमान में क्या!

    यूँ जो तकता है आसमान को तू, कोई रहता है आसमान में क्या|           जौन एलिया    

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