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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 14th Dec 2023

    वो तिरा रो रो के!

    आ गया गर वस्ल की शब भी कहीं ज़िक्र-ए-फ़िराक़, वो तिरा रो रो के मुझको भी रुलाना याद है|                हसरत मोहानी

  • 14th Dec 2023

    बातों में जताना याद है!

    तुझको जब तन्हा कभी पाना तो अज़-राह-ए-लिहाज़, हाल-ए-दिल बातों ही बातों में जताना याद है|                हसरत मोहानी

  • 14th Dec 2023

    वो मुँह छुपाना याद है!

    खींच लेना वो मिरा पर्दे का कोना दफ़अ‘तन, और दुपट्टे से तिरा वो मुँह छुपाना याद है|               हसरत मोहानी

  • 14th Dec 2023

    इक बार मेरे घर आए!

    मुझ को अपना पता-ठिकाना मिले, वो भी इक बार मेरे घर आए|     गुलज़ार

  • 14th Dec 2023

    लेखनी के पास हस्ताक्षर नहीं है!

    आज एक बार मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि और श्रेष्ठ गीतकार श्री शिव ओम अम्बर जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| अम्बर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है श्री शिव ओम अम्बर जी की यह ग़ज़ल – लेखनी के पास हस्ताक्षर नहीं है,यक्ष-प्रश्नों के…

  • 13th Dec 2023

    उँगली दबाना याद है!

    तुझसे कुछ मिलते ही वो बेबाक हो जाना मिरा, और तिरा दाँतों में वो उँगली दबाना याद है|                हसरत मोहानी

  • 13th Dec 2023

    वो ज़माना याद है!

    चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है, हमको अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है|                 हसरत मोहानी

  • 13th Dec 2023

    तिरा क्या ख़याल है!

    फिर कोई ख़्वाब देखूँ कोई आरज़ू करूँ, अब ऐ दिल-ए-तबाह तिरा क्या ख़याल है|                 जावेद अख़्तर  

  • 13th Dec 2023

    ये मेरा ही जाल है!

    बे-दस्त-ओ-पा हूँ आज तो इल्ज़ाम किसको दूँ, कल मैंने ही बुना था ये मेरा ही जाल है|              जावेद अख़्तर

  • 13th Dec 2023

    जो शीशे में बाल है!

    आसूदगी* से दिल के सभी दाग़ धुल गए, लेकिन वो कैसे जाए जो शीशे में बाल है| *खुशहाली              जावेद अख़्तर  

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