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रौशनी अंधेरे का विलोम नहीं होती!
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि कुमारेंद्र पारस नाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।इनकी अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है कुमारेंद्र पारस नाथ सिंह जी की यह कविता- यहाँ से वहाँ तक दौड़ती रहती है।कभी-कभीजब बहुत घना हो जाता है अंधेरा,लगता है,/ नहीं है–…
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वो सुबह कभी तो आएगी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में फिल्म- फिर सुबह होगी, के लिए मुकेश जी का गाया यह बहुत सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- वो सुबह कभी तो आएगी आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद।
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सपनों का व्यापार!
प्रस्तुत है आज का एक ग़ज़ल, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- झंझट सदा रहेंगे यारग़ज़लें तो लिख लें दो-चार। सुख-दुख सारे सहकर हमकरते सपनों का व्यापार। पुरस्कार तुम ले लेनाबात हमें कहने दो यार। दिल के हम सरमायादारपर लोगों का बहुत उधार। बसे दूर कितने आकरक्या देखें दिल्ली दरबार। अरमानों से रहती हैठोस हक़ीकत की…