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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 16th Dec 2021

    फिर-फिर वही सन्नाटा है!

    देखिए तो वही बहकी हुई हवाएँ हैं,फिर वही रात है, फिर-फिर वही सन्नाटा है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    शोर उठता है कहीं दूर

    शोर उठता है कहीं दूर क़ाफिलों का-सा,कोई सहमी हुई आवाज़ में बुलाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    द्वार मेरा कोई उस वक्त—

    होश अपना भी रहता नहीं मुझे जिस वक्त,द्वार मेरा कोई उस वक्त खटखटाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    कोई लौट-लौट जाता है!

    जागिए तो यहाँ मिलती नहीं आहट कोई,नींद में जैसे कोई लौट-लौट जाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    जी यहाँ घबराता है!

    अजनबी देश है यह, जी यहाँ घबराता है,कोई आता है यहाँ पर न कोई जाता है| सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

  • 16th Dec 2021

    रुला के गया, सपना मेरा!

    कल मैंने भारतीय सिनेमा जगत के दो महान व्यक्तित्वों – राज कपूर जी को उनके जन्म दिन पर और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी को उनकी पुण्य तिथि पर याद किया था| कल मैंने राज साहब की फिल्म – ‘मेरा नाम जोकर’ का एक गीत भी उनकी स्मृति में शेयर किया था| आज…

  • 15th Dec 2021

    अच्छी ख़बर नहीं लाते!

    ‘वसीम’ जहन बनाते हैं तो वही अख़बार,जो ले के एक भी अच्छी ख़बर नहीं आते| वसीम बरेलवी

  • 15th Dec 2021

    बचने के घर नहीं आते!

    बिसात-ए-इश्क पे बढ़ना किसे नहीं आता,यह और बात कि बचने के घर नहीं आते| वसीम बरेलवी

  • 15th Dec 2021

    आँसू की भी जगह रखना!

    ख़ुशी की आँख में आँसू की भी जगह रखना,बुरे ज़माने कभी पूछकर नहीं आते| वसीम बरेलवी

  • 15th Dec 2021

    तहज़ीब-ए-ग़म समझने का!

    जिन्हें सलीका है तहज़ीब-ए-ग़म समझने का,उन्हीं के रोने में आँसू नज़र नहीं आते| वसीम बरेलवी

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