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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Dec 2021

    लौटकर नहीं आते!

    मुहब्बतों के दिनों की यही ख़राबी है,ये रूठ जाएँ तो फिर लौटकर नहीं आते| वसीम बरेलवी

  • 15th Dec 2021

    मिट्टी के घर नहीं आते!

    तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते,इसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते| वसीम बरेलवी

  • 15th Dec 2021

    कहता है जोकर!

    कल भारतीय सिनेमा जगत के ‘सपनों के सौदागर’ राज कपूर जी का जन्म दिन था और उनके साथी और महान जनकवि शैलेन्द्र जी की पुण्य तिथि भी थी| एक दिन देर से ही सही मैं उन दोनों महान हस्तियों का पुण्य स्मरण करता हूँ| शैलेन्द्र जी को ‘तीसरी कसम’ बनाने की उनकी धुन ले बैठी…

  • 14th Dec 2021

    गर्मी-ए-मोहब्बत में वो!

    गर्मी-ए-मोहब्बत में वो है आह से माने,पंखा नफ़स-ए-सर्द का झलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Dec 2021

    मुँह से निकलने नहीं देते!

    दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त,हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Dec 2021

    किस तरह करूँ अर्ज़-ए-तमन्ना!

    हैरान हूँ किस तरह करूँ अर्ज़-ए-तमन्ना,दुश्मन को तो पहलू से वो टलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Dec 2021

    जलने नहीं देते!

    परवानों ने फ़ानूस को देखा तो ये बोले,क्यों हम को जलाते हो कि जलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Dec 2021

    करवट भी बदलने नहीं देते!

    किस नाज़ से कहते हैं वो झुंझला के शब-ए-वस्ल,तुम तो हमें करवट भी बदलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Dec 2021

    संभलने नहीं देते!

    ख़ातिर से तेरी याद को टलने नहीं देते,सच है कि हमीं दिल को संभलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

  • 14th Dec 2021

    अरमान मेरे दिल का—

    आँखें मुझे तल्वों से वो मलने नहीं देते,अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी

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