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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 19th Dec 2021

    वो लहर हो गई!

    कल के औ आज के, मुझ में यह फ़र्क है,जो नदी थी कभी वो लहर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    कोई खुद्दार दीपक—

    कोई खुद्दार दीपक जले किसलिए,जब सियासत अंधेरों का घर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    इतने अभी बच गए आदमी!

    हाय इतने अभी बच गए आदमी,गिनते-गिनते जिन्हें दोपहर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    लो अब सहर हो गई!

    घर की दीवार पोती गई इस तरह,लोग समझें कि लो अब सहर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    एक बस्ती थी वो भी—

    ज़िंदगी एक-रस किस क़दर हो गई,एक बस्ती थी वो भी शहर हो गई| रामावतार त्यागी

  • 19th Dec 2021

    तुम्हारी मस्त नज़र!

    आज मैं पुरानी फिल्म- ‘दिल ही तो है’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| इस फिल्म के नायक राज कपूर थे और उनकी नायिका नूतन थीं| इस फिल्म के लिए मुकेश जी ने ये प्यारा सा गीत गाया था| आज का यह गीत साहिर लुधियानवी जी का लिखा हुआ है और इसे रोशन जी…

  • 18th Dec 2021

    संबंध का काँवर न फेंक!

    यह तेरी काँवर नहीं कर्तव्य का अहसास है,अपने कंधे से श्रवण! संबंध का काँवर न फेंक| कुंवर बेचैन

  • 18th Dec 2021

    मचलती नाव पर पत्थर न फेंक!

    फेंकने ही हैं अगर पत्थर तो पानी पर उछाल,तैरती मछली, मचलती नाव पर पत्थर न फेंक| कुंवर बेचैन

  • 18th Dec 2021

    आँधियों का डर न फेंक

    जो धरा से कर रही हैं कम गगन का फासला,उन उड़ानों पर अंधेरी आँधियों का डर न फेंक| कुंवर बेचैन

  • 18th Dec 2021

    मौत का मंतर न फेंक!

    हो सके तो चल किसी की आरजू के साथ-साथ,मुस्कराती ज़िंदगी पर मौत का मंतर न फेंक| कुंवर बेचैन

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