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वो रवानी दे गया!
सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी
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आँखों में पानी दे गया!
जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी
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हम डोले ऑल अलोंग!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज सिर्फ दो लाइन की टाइम पास, हिंग्लिश, आप इसे कविता भी कह सकते हैं, कहीं सुना था बहुत पहले, वही उगल दे रहा हूँ- आशा है आपको पसंद आई होगी,धन्यवाद। ******
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मैं चलता!
आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ हिंदी नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– मैं चलतामेरे साथ चला करता पग-पगवह सत्य कि जिसको पाकरधन्य हुआ जीवन ।…