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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 18th Mar 2026

    वो रवानी दे गया!

    सर मिरे सीने पे उस ने जब रखा है ज़िंदगी,इस तरह दरिया-ए-दिल को वो रवानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 18th Mar 2026

    ऐसी कहानी दे गया!

    सुनते सुनते दास्ताँ सो जाएँगे सब चारागर,ख़त्म जो होगी नहीं ऐसी कहानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 18th Mar 2026

    आँखों में पानी दे गया!

    जाते जाते वो मुझे अपनी निशानी दे गया,ज़िंदगी-भर के लिए आँखों में पानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 18th Mar 2026

    हम डोले ऑल अलोंग!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज सिर्फ दो लाइन की टाइम पास, हिंग्लिश, आप इसे कविता भी कह सकते हैं, कहीं सुना था बहुत पहले, वही उगल दे रहा हूँ- आशा है आपको पसंद आई होगी,धन्यवाद। ******

  • 18th Mar 2026

    कोई परिंदा मुझ में!

    उड़ता रहता है रातों को,‘क़ैसर’ कोई परिंदा मुझ में। नज़ीर क़ैसर

  • 18th Mar 2026

    ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से कल मैंने ‘बरसात की रात’ फिल्म का इसी शीर्षक वाला गीत जो लता जी ने गाया था, वह प्रस्तुत किया था, आज मैं अपने स्वर में, इसी शीर्षक वाला वह गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जो रफी साहब ने गाया था- ज़िंदगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात,…

  • 18th Mar 2026

    बरस रही थी बारिश!

    बरस रही थी बारिश बाहर,और वो भीग रहा था मुझ में। नज़ीर क़ैसर

  • 18th Mar 2026

    मैं चलता!

    आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ हिंदी नवगीतकार श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री बुद्धिनाथ मिश्र जी का यह नवगीत– मैं चलतामेरे साथ चला करता पग-पगवह सत्य कि जिसको पाकरधन्य हुआ जीवन ।…

  • 17th Mar 2026

    खिला हुआ था शोला !

    ख़ाली थी गुल-दान में टहनी,खिला हुआ था शोला मुझ में। नज़ीर क़ैसर

  • 17th Mar 2026

    भूल गया है रस्ता मुझ में!

    कोई मुझ को ढूँढने वाला,भूल गया है रस्ता मुझ में। नज़ीर क़ैसर

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