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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 22nd Jul 2026

    यहाँ तक आते आते!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में दुष्यंत कुमार जी की ग़ज़ल का अगला शेर – यहाँ तक आते आते सूख जाती हैँ कई नदियां! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 22nd Jul 2026

    घर, शहर, दीवार, सन्नाटा!

    अपनी ब्लॉगिंग की यात्रा के प्रारंभ में, लगभग 8 वर्ष पहले मैंने अपने जीवन के अनेक प्रसंग विस्तार से लिखे थे, अब तो आलस्य हावी हो गया है और मैं ज्यादा लंबा नहीं लिख पाता। आज उसी पुराने समय की अपनी ब्लॉग पोस्ट पुनः प्रस्तुत जिसमें दिल्ली छोडने से पहले के कविता से संबंधित प्रसंग…

  • 21st Jul 2026

    अपने साए से चौंक जाते हैं!

    अपने साए से चौंक जाते हैं,उम्र गुज़री है इस क़दर तन्हा| गुलज़ार

  • 21st Jul 2026

    क़ाफ़िला साथ और!

    ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा,क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा| गुलज़ार

  • 21st Jul 2026

    गाता रहे मेरा दिल!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- गाता रहे मेरा दिल, तू ही मेरी मंजिलफिल्म गाइड मुख्य कलाकार- देव आनंद, वहीदा रहमान गीतकार- शैलेन्द्र संगीतकार- सचिन देव बर्मन गायक- किशोर कुमार, लता मंगेशकर प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ****

  • 21st Jul 2026

    यूँ तो हज़ार दर्द से!

    यूँ तो हज़ार दर्द से रोते हैं बद-नसीब,तुम दिल दुखाओ वक़्त-ए-मुसीबत तो बात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 21st Jul 2026

    ये सारा जिस्म झुककर

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में दुष्यंत कुमार जी की ग़ज़ल का पहला शेर – ये सारा जिस्म झुककर बोझ से दुहरा हुआ होगा! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 21st Jul 2026

    शेर अपने बिल में!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि उद्भ्रांत जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। उद्भ्रांत जी की अधिक रचनाएं मैंने पहले शेयर नहीं की हैं। आज प्रस्तुत हैं उद्भ्रांत जी की यह कविता- चूहाअपने बिल मेंशेर की तरहबेखौफ़ ताव देतामूँछो पर वक़्त-बेवक़्तगुर्राता ज़रूरत पड़ने परमारे दहाड़ चुहिया नेललकारामर्दानगी को निकला छाती फुलाएअकड़ाए हुए गर्दनपूरी ऐंठ…

  • 20th Jul 2026

    उस जान-ए-दोस्ती का!

    उस जान-ए-दोस्ती का ख़ुलूस-ए-निहाँ न पूछ, जिस का सितम भी ग़ैरत-ए-सद-इल्तिफ़ात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 20th Jul 2026

    ज़िंदान-ए-अक़्ल तेरी !

    तोड़ा है ला-मकाँ की हदों को भी इश्क़ ने,ज़िंदान-ए-अक़्ल तेरी तो क्या काएनात है| फ़िराक़ गोरखपुरी

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