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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 20th Mar 2026

    दुनिया में हमारा दिल ही तो है!

    फिल्म ‘दिल ही तो है’ के शीर्षक से संबंधित दो बहुत खूबसूरत गीत साहिर लुधियानवी जी ने लिखे थे जिनको रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने अपने अनोखे अंदाज़ में गाया था। इनमें से एक गीत मैं आज, अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जो मस्ती के मूड में है- दिल…

  • 20th Mar 2026

    यूँही कब तलक ख़ुदाया!

    ये रुके रुके से आँसू ये दबी दबी सी आहें,यूँही कब तलक ख़ुदाया ग़म-ए-ज़िंदगी निबाहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 20th Mar 2026

    उनको प्रणाम!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि बाबा नागार्जुन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। आगार्जुन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है जनकवि बाबा नागार्जुन जी की यह कविता– जो नहीं हो सके पूर्ण–काममैं उनको करता हूँ प्रणाम । कुछ कंठित औ’ कुछ…

  • 19th Mar 2026

    ले गया हमराह अपने!

    ले गया हमराह अपने वो मकाँ और बाम-ओ-दर,है नज़र सब कुछ मगर इक बे-मकानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 19th Mar 2026

    फिर से जवानी दे गया!

    बज़्म में बे-पर्दा आया मुस्कुरा कर सामने,ना-तवाँ दिल को मिरे फिर से जवानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 19th Mar 2026

    भोज के बाद पंडित जी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से कुछ हल्का फुल्का प्रसंग- आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 19th Mar 2026

    अलफ़ाज़-ओ-मा’नी दे गया!

    थी ग़ज़ल मेरी बहुत बे-रब्त बे-कैफ़-ओ-असर,वो मिरे अशआ’र को अलफ़ाज़-ओ-मा’नी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 19th Mar 2026

    बद-गुमानी दे गया!

    बात भी इतनी कि बस उस ने किया मुझ को सलाम,हाँ मगर लोगों के दिल में बद-गुमानी दे गया| नज़र कानपुरी

  • 19th Mar 2026

    कल चौदहवीं की रात थी!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में इब्न-ए-इंशा साहब की लिखी प्रसिद्ध ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ, जिसे जगजीत सिंह जी ने बड़ी खूबसूरती से गाया है- कल चौदहवीं की रात थी, शब भर रहा चर्चा तेरा! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद! *******

  • 19th Mar 2026

    गिरे ताड़ से!

    आज एक बार फिर मैं वरिष्ठ हिंदी नवगीतकार श्री नचिकेता जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। नचिकेता जी की कुछ ही रचनाएं मैंने पहले शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री नचिकेता जी का यह नवगीत– गिरे ताड़ सेमगर बीच में हीखजूर पर हम अँटके।घर की झोल लगी दीवारों पर हैंचमगादड़ लटकेखूस…

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