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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 21st Mar 2026

    जूता चल गया!

    एक पुराने शेर के बहाने, आज के समय पर संक्षिप्त वक्तव्य- आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 21st Mar 2026

    तिरी निगाह का जादू!

    मुझे नहीं किसी उसलूब-ए-शाइरी की तलाश,तिरी निगाह का जादू मिरे सुख़न में रहे|‘ मजरूह सुल्तानपुरी

  • 21st Mar 2026

    नादां था बेचारा दिल ही तो है!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से कल मैंने फिल्म- ‘दिल ही तो है’ के लिए इसके शीर्षक से संबंधित एक मस्ती भरा गीत प्रस्तुत किया था, आज उसके विपरीत निराशा और पछतावे से भरा गीत मेरे स्वर में प्रस्तुत है, इस गीत को भी मुकेश जी ने गाया था, लिखा था साहिर लुधियानवी जी ने…

  • 21st Mar 2026

    मिरे जुनूँ की महक!

    तू ऐ बहार-ए-गुरेज़ाँ किसी चमन में रहे,मिरे जुनूँ की महक तेरे पैरहन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 21st Mar 2026

    अंतिम पर्दा – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद…

  • 20th Mar 2026

    हमें शुऊर-ए-जुनूँ है!

    हमें शुऊर-ए-जुनूँ है कि जिस चमन में रहे,निगाह बन के हसीनों की अंजुमन में रहे| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 20th Mar 2026

    वहीं डाल दी हैं बाँहें!

    कभी जादा-ए-तलब से जो फिरा हूँ दिल-शिकस्ता,तिरी आरज़ू ने हँस कर वहीं डाल दी हैं बाँहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 20th Mar 2026

    चूहेदानी भर गई!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं काका हाथरसी जी की यह हास्य कविता, अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- चूहेदानी भर गई, चूहे पकडे बीस! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ****

  • 20th Mar 2026

    वहीं इन की बारगाहें!

    तिरे ख़ानुमाँ-ख़राबों का चमन कोई न सहरा,ये जहाँ भी बैठ जाएँ वहीं इन की बारगाहें| मजरूह सुल्तानपुरी

  • 20th Mar 2026

    कहीं जगमगा उठी हैं!

    कहीं ज़ुल्मतों में घिर कर है तलाश-ए-दश्त-ए-रहबर,कहीं जगमगा उठी हैं मिरे नक़्श-ए-पा से राहें| मजरूह सुल्तानपुरी

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