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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Jul 2026

    मिरे दिल को खल रही है!

    मैं जानता हूँ कि ख़ामुशी में ही मस्लहत है,मगर यही मस्लहत मिरे दिल को खल रही है| जावेद अख़्तर

  • 25th Jul 2026

    बस्ती भी जल रही है!

    न जलने पाते थे जिस के चूल्हे भी हर सवेरे,सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है| जावेद अख़्तर

  • 25th Jul 2026

    ज़िक्र होता है जब क़यामत का!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- ज़िक्र होता है जब क़यामत का तेरे जलवों की बात होती है !फिल्म- माई लव का गीत मुख्य कलाकार- शशि कपूर, शर्मिला टैगोर गीतकार- आनंद बक्षी संगीतकार- दान सिंह गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 25th Jul 2026

    नीली सतह पर!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता- सुख की अनंग पुनरावृत्तियों में,जीवन की मोहक परिस्थितियों में,कहाँ वे सन्तोषजिन्हें आत्मा द्वारा चाहा जाता है ? शीघ्र थक जाती…

  • 24th Jul 2026

    दीवार गल रही है!

    मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन,मिरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है| जावेद अख़्तर

  • 24th Jul 2026

    धीरे धीरे पिघल रही है!

    जो मुझ को ज़िंदा जला रहे हैं वो बे-ख़बर हैं,कि मेरी ज़ंजीर धीरे धीरे पिघल रही है| जावेद अख़्तर

  • 24th Jul 2026

    वक़्त करता जो वफा!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- वक़्त करता जो वफा आप हमारे होते!फिल्म- दिल ने पुकारामुख्य कलाकार- शशि कपूर, राजश्रीगीतकार- इंदीवरसंगीतकार- कल्याणजी आनंदजीगायक- मुकेशप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *****

  • 24th Jul 2026

    उँगलियों से फिसल रही है!

    वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है,ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है| जावेद अख़्तर

  • 24th Jul 2026

    तुम्हारे शहर में ये शोर!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में दुष्यंत कुमार जी की ग़ज़ल का अगला शेर –तुम्हारे शहर में ये शोर सुन सुनकर तो लगता है!दुष्यंत कुमार जी हिंदी के एक प्रमुख कवि थी जिन्होंने आपात काल में क्रांतिकारी ग़ज़लें लिखी थीं जिनको ‘साये में धूप’ नाम संकलन में प्रकाशित किया…

  • 23rd Jul 2026

    फिर न माँगेंगे ज़िंदगी!

    फिर न माँगेंगे ज़िंदगी या-रब,ये गुनह हम ने एक बार किया| गुलज़ार

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