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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 24th Mar 2026

    खोल दूं यह आज का दिन!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। केदारनाथ सिंह जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की यह कविता– खोल दूं यह आज का दिनजिसे-मेरी देहरी के पास कोई रख गया है,एक…

  • 23rd Mar 2026

    आसानी से मर जाऊँ!

    मैं इतना सख़्त-जाँ हूँ दम बड़ी मुश्किल से निकलेगा, ज़रा तकलीफ़ बढ़ जाए तो आसानी से मर जाऊँ| महशर आफ़रीदी      

  • 23rd Mar 2026

    तो हैरानी से मर जाऊँ!

    तुम उस को देख कर छू कर भी ज़िंदा लौट आए हो,मैं उस को ख़्वाब में देखूँ तो हैरानी से मर जाऊँ| महशर आफ़रीदी

  • 23rd Mar 2026

    मैं पानी से मर जाऊँ!

    लब-ए-साहिल समुंदर की फ़रावानी से मर जाऊँ,मुझे वो प्यास है शायद कि मैं पानी से मर जाऊँ| महशर आफ़रीदी

  • 23rd Mar 2026

    जुगणि !

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं पंजाबी लोक शैली के इस गीत की कुछ पंक्तियां अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ- जुगणि जा बडी सदर बाजार! आशा है आपको यह पसंद आएंगी, धन्यवाद। ******

  • 23rd Mar 2026

    कुछ बात थी जो लब!

    कुछ बात थी जो लब नहीं खुलते थे हमारे,तुम समझे थे गूँगों के ज़बानें नहीं होतीं| मुनव्वर राना

  • 23rd Mar 2026

    ये शेर है छुप कर कभी!

    ये शेर है छुप कर कभी हमला नहीं करता,मैदानी इलाक़ों में मचानें नहीं होतीं| मुनव्वर राना

  • 23rd Mar 2026

    मैं ढूंढता हूँ उनको!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- ठोकर के लिए मुकेश जी का गाया ये मधुर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे लिख थ साजन देहलवी जी ने और संगीत था श्यामजी घनश्याम जी का- मैं ढूंढता हूँ उनको रातों को खयालों में! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 23rd Mar 2026

    रद क्यूँ तिरी यादों की!

    इन पर किसी मौसम का असर क्यूँ नहीं होता,रद क्यूँ तिरी यादों की उड़ानें नहीं होतीं| मुनव्वर राना

  • 23rd Mar 2026

    उजास!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। कुंवर नारायण जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय कुंवर नारायण जी की यह कविता– तब तक इजिप्ट के पिरामिड नहीं बने थेजब दुनिया मेंपहले प्यार का जन्म…

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