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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 28th Jul 2026

    नई-नई सी कोई रौशनी!

    मिरे वुजूद को अपने में जज़्ब करती हुई,नई-नई सी कोई रौशनी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 28th Jul 2026

    चंचल शीतल निर्मल कोमल !

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- चंचल शीतल निर्मल कोमल संगीत की देवी स्वर सजनी फिल्म- सत्यम शिवम सुंदरम मुख्य कलाकार- शशि कपूर, ज़ीनत अमान गीतकार- आनंद बक्षी संगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलाल गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 28th Jul 2026

    खोल दूं यह आज का दिन!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय केदारनाथ सिंह जी की यह कविता- खोल दूं यह आज का दिनजिसे-मेरी देहरी के पास कोई रख गया है,एक हल्दी-रंगेताजेदूर देशी पत्र-सा।थरथराती रोशनी में,हर संदेशे…

  • 27th Jul 2026

    ज़िन्दगी है और मैं हूं!

    हयात जैसे ठहर सी गयी हो ये ही नहींतमाम बीती हुई ज़िन्दगी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 27th Jul 2026

    अगर हम कहें और!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में सुदर्शन फाकिर जी की ग़ज़ल का पहला शेर – अगर हम कहें और वो मुस्करा दें! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 27th Jul 2026

    ये लम्हा ज़ीस्त का बस !

    ये लम्हा ज़ीस्त का बस आख़िरी है और मैं हूं,हर एक सम्त से अब वापसी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 27th Jul 2026

    झुका दरख़्त हवा से!

    झुका दरख़्त हवा से तो आँधियों ने कहा, ज़ियादा फ़र्क़ नहीं झुकने टूट जाने में| जावेद अख़्तर

  • 27th Jul 2026

    पर इक सुकून था!

    समझ लिया था कभी इक सराब को दरिया,पर इक सुकून था हम को फ़रेब खाने में| जावेद अख़्तर

  • 27th Jul 2026

    मुझको यारो माफ़ करना!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- मुझको यारो माफ़ करना, मैं नशे में हूँ! फिल्म- मैं नशे में हूँ मुख्य कलाकार- राज कपूर, माला सिन्हा गीतकार- शैलेन्द्र संगीतकार- शंकर जयकिशन गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 27th Jul 2026

    जो जीवन की धूल चाटकर!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय केदारनाथ अग्रवाल जी की यह कविता- जो जीवन की धूल चाट कर बड़ा हुआ हैतूफ़ानों से लड़ा और फिर खड़ा हुआ हैजिसने सोने को खोदा लोहा…

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