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पुकारे तो सभी जाएँगे!
मस्जिदें सब को बुलाती हैं भलाई की तरफ़,आएँ न आएँ पुकारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी
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तन्हा-तन्हा दुख झेलेंगे!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में निदा फाज़ली साहब की लिखी यह खुबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने बहुत सुंदर ढंग से गाया है- तन्हा-तन्हा दुख झेलेंगे, महफिल-महफिल गाएंगे! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ********
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दिन यों ही बीत गया !
आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी नवगीतकार स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मालवीय जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत– दिन यों ही बीत गया !अञ्जुरी में भरा-भरा जल जैसे रीत गया । सुबह…
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नद्दियाँ लाशों को!
नद्दियाँ लाशों को पानी में नहीं रखती हैं, तैरें या डूबें किनारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी
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मारे तो सभी जाएँगे!
दर्द की हद से गुज़ारे तो सभी जाएँगे,जल्द या देर से मारे तो सभी जाएँगे| शकील आज़मी
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अब तो बदनामी से!
अब तो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग,नंगे हो जाते हैं अख़बार में रहने के लिए| शकील आज़मी
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कुर्ती मलमल दी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं अपने स्वर में यह पंजाबी टप्पा प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया था- आशा है आपको पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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रफ़्तार में रहने के लिए!
ऐसी मजबूरी नहीं है कि चलूँ पैदल मैं,ख़ुद को गर्माता हूँ रफ़्तार में रहने के लिए| शकील आज़मी