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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 31st Jul 2026

    पहचानता लगे है मुझे!

    मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह,ये मेरा गाँव तो पहचानता लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर

  • 31st Jul 2026

    क़यामत के दीवाने!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में सुदर्शन फाकिर जी का एक और शेर – क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******

  • 31st Jul 2026

    वो ख़ुद भी बात करे !

    मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ,वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर

  • 31st Jul 2026

    बारिश में घर लौटा कोई!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय कैलाश गौतम जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। गौतम जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय कैलाश गौतम जी का यह नवगीत-  बारिश में घर लौटा कोई      दर्पण देख रहा      न्यूटन जैसे पृथ्वी का      आकर्षण देख रहा । धान-पान-सी आदमकदहरियाली लिपटी है,हाथों…

  • 31st Jul 2026

    जब दिल ही टूट गया!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- जब दिल ही टूट गया हम जी के क्या करेंगे! फिल्म- शाहजहां मुख्य कलाकार- के एल सहगल, रागिनी आदि गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीत- नौशाद गायक- के एल सहगल प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 30th Jul 2026

    मैं सो भी जाऊँ तो!

    मैं सो भी जाऊँ तो क्या मेरी बंद आँखों में,तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर

  • 30th Jul 2026

    कभी ग़म की आंधी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में सुदर्शन फाकिर जी की ग़ज़ल का अगला शेर – कभी ग़म की आंधी जिन्हें छू न पाए! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 30th Jul 2026

    जो आँसुओं में कभी!

    जो आँसुओं में कभी रात भीग जाती है,बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर

  • 30th Jul 2026

    ये दिल का दाग़ जो!

    पसंद-ए-ख़ातिर-ए-अहल-ए-वफ़ा है मुद्दत से,ये दिल का दाग़ जो ख़ुद भी भला लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर

  • 30th Jul 2026

    बद-दुआ लगे है मुझे!

    हर एक रूह में इक ग़म छुपा लगे है मुझे,ये ज़िंदगी तो कोई बद-दुआ लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर

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