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पहचानता लगे है मुझे!
मैं सोचता था कि लौटूँगा अजनबी की तरह,ये मेरा गाँव तो पहचानता लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर
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क़यामत के दीवाने!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में सुदर्शन फाकिर जी का एक और शेर – क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******
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वो ख़ुद भी बात करे !
मैं जब भी उस के ख़यालों में खो सा जाता हूँ,वो ख़ुद भी बात करे तो बुरा लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर
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जब दिल ही टूट गया!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- जब दिल ही टूट गया हम जी के क्या करेंगे! फिल्म- शाहजहां मुख्य कलाकार- के एल सहगल, रागिनी आदि गीतकार- मजरुह सुल्तानपुरी संगीत- नौशाद गायक- के एल सहगल प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ******
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मैं सो भी जाऊँ तो!
मैं सो भी जाऊँ तो क्या मेरी बंद आँखों में,तमाम रात कोई झाँकता लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर
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कभी ग़म की आंधी!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में सुदर्शन फाकिर जी की ग़ज़ल का अगला शेर – कभी ग़म की आंधी जिन्हें छू न पाए! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****
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जो आँसुओं में कभी!
जो आँसुओं में कभी रात भीग जाती है,बहुत क़रीब वो आवाज़-ए-पा लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर
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ये दिल का दाग़ जो!
पसंद-ए-ख़ातिर-ए-अहल-ए-वफ़ा है मुद्दत से,ये दिल का दाग़ जो ख़ुद भी भला लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर
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बद-दुआ लगे है मुझे!
हर एक रूह में इक ग़म छुपा लगे है मुझे,ये ज़िंदगी तो कोई बद-दुआ लगे है मुझे| जाँ निसार अख़्तर