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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Mar 2026

    अपनी दुनिया के लोग!

    अपनी दुनिया के लोग लगते हैंकुछ हैं छोटे तो कुछ बड़े हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

  • 27th Mar 2026

    किया है प्यार जिसे!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं क़तील शिफाई जी की एक ग़ज़ल अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे ग़ुलाम अली जी ने बहुत खूबसूरती से गाया है- किया है प्यार जिसे हमने ज़िंदगी की तरह! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******

  • 27th Mar 2026

    परचमों की तरह!

    जीत कर कौन इस ज़मीं को गया,परचमों की तरह गड़े हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

  • 27th Mar 2026

    एक वक़्त की रोटी खाते!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि एवं पूर्व सांसद श्री उदयप्रताप सिंह जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। उदय प्रताप जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री उदयप्रताप सिंह जी की यह ग़ज़ल – एक वक़्त की रोटी खाते आधे हिन्दुस्तानी लोगकाले धन…

  • 26th Mar 2026

    कोंपलें फूल पत्तियाँ!

    कोंपलें फूल पत्तियाँ देखो,कौन कहता है ये कड़े हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

  • 26th Mar 2026

    बात पर अड़े हैं पेड़!

    जिस जगह हैं न टस से मस होंगे,कौन सी बात पर अड़े हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

  • 26th Mar 2026

    इंतिज़ार है किस का!

    क्या ख़बर इंतिज़ार है किस का,साल हा साल से खड़े हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

  • 26th Mar 2026

    तो रो पड़े हैं पेड़!

    बाग़बाँ हो गये लकड़हारे,हाल पूछा तो रो पड़े हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

  • 26th Mar 2026

    कारवां गुज़र गया-1

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज से मैं नीरज जी के इस प्रसिद्ध को छोटे-छोटे अंशों में प्रस्तुत कर रहा हूँ, आज प्रस्तुत है पहला भाग- कारवां गुज़र गया गुबार देखते रहे-1 आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******

  • 26th Mar 2026

    आँसुओं की तरह!

    कौन आया था किस से बात हुईआँसुओं की तरह झरे हैं पेड़। सूर्यभानु गुप्त

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