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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Jul 2026

    शायरी है और मैं हूं!

    जहां न सुख का हो अहसास और न दुख की कसक,उसी मक़ाम पे अब शायरी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 30th Jul 2026

    फूल तुम्हें भेजा है खत में!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है, मेरे स्वर में फिल्म -‘सरस्वतीचंद्र के लिए मुकेश जी और लता जी का यह मधुर गीत फूल तुम्हें भेजा है खत में फूल नहीं मेरा दिल है आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। ****

  • 30th Jul 2026

    तुम और मैं: दो आयाम

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय रामदरश मिश्र जी की यह कविता- एक बहुत दिनों के बादहम उसी नदी के तट से गुज़रेजहाँ नहाते हुए नदी के साथ हो…

  • 29th Jul 2026

    अजीब प्यास, अजब तिश्नगी!

    किसी मक़ाम पे रुकने को जी नहीं करता,अजीब प्यास, अजब तिश्नगी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 29th Jul 2026

    अगर खुद को भूले तो!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में सुदर्शन फाकिर जी की ग़ज़ल का अगला शेर – अगर खुद को भूले तो कुछ भी न भूले! आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *****

  • 29th Jul 2026

    ज़िंदा हूं इस तरह कि!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- ज़िंदा हूं इस तरह कि ग़म ए ज़िंदगी नहींफिल्म- आग मुख्य कलाकार- राज कपूर, नर्गिस गीतकार- बेहज़ाद लखनवी संगीतकार- राम गांगुली गायक- मुकेश प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । ******

  • 29th Jul 2026

    मन की सीमा के पास-पास!

    आज मैं अत्यंत श्रेष्ठ तथा मुझे बहुत प्रिय हिंदी कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। किशन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं स्वर्गीय किशन सरोज जी का यह नवगीत- मन की सीमा के पास-पासतन की सीमा से दूर-दूर,तुमने यों महकाईं मेरी…

  • 28th Jul 2026

    हिज्रो-विसाल कुछ भी नहीं!

    अकेला इश्क़ है हिज्रो-विसाल कुछ भी नहीं,बस एक आलमे-दीवानगी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 28th Jul 2026

    बाज़ी बिछी है और मैं हूं!

    मुक़ाबिल अपने कोई है ज़ुरूर कौन है वो,बिसाते-दहर है, बाज़ी बिछी है और मैं हूं। कृष्ण बिहारी ‘नूर’

  • 28th Jul 2026

    हरएक मोड़ पर हम!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है सुदर्शन फाकिर जी का एक और शेर, जिसे जगजीत सिंह जी ने गाया था –हरएक मोड़ पर हम ग़मों को सजा दें! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद । *******

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