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एक स्टेशन पे गाड़ी!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं कुछ हास्य पंक्ति सुना रहा हूँ, जो मैंने बहुत पहले ट्रेन यात्रा करते समय ही सुनी थी, किसने लिखा है मुझे मालूम नहीं है- एक स्टेशन पे गाड़ी क्यों चिपककर रह गई! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। *******
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पेड़
आज फिर से मेरी एक पुरानी रचना प्रस्तुत है, आप सुधीजनों की सम्मति चाहूंगा- पेड़ हमारी आस्थाओं का प्रतिफलन है,पेड़ बनने के लिए ज़रूरी हैकि पहले हम ऐसा बीज हों-जिसे धरती स्वीकार करे,फिर धरती में रचे-बसेरसों-स्वादों, मूल रसायनों से भीहमारा तालमेल हो,तभी हम धरती का सीना चीरकरअपना नाज़ुक सिर, शान से उठा सकेंगे।फिर यहाँ की…
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आँख मूँद के पी जाओ!
तुम आँख मूँद के पी जाओ ज़िंदगी ‘क़ैसर’,कि एक घूँट में मुमकिन है बद-मज़ा न लगे| क़ैसर-उल जाफ़री
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आगरे का धोबी- हास्य कविता!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं स्वर्गीय ओमप्रकाश आदित्य जी की यह हास्य कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ- आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******