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कोहरा!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अश्वघोष जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ।अश्वघोष जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री अश्वघोष जी का यह नवगीत- पता नहीं किस ज़ालिम डर सेउठा नहीं सूरज बिस्तर से । मुख पर हाथ धरे कोलाहल,ढूँढ़ रहा इस जड़ता का हल…
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उतारना है ये क़र्ज़ा भी!
हयात जिस की अमानत है सौंप दूँ उस को, उतारना है ये क़र्ज़ा भी अपने सर से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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बेसन की सौंधी रोटी पर!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में निदा फाजली जी की मां पर लिखी ग़ज़ल का पहला शेर – बेसन की सौंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *******
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मेरी रहगुज़र से मुझे!
हमेशा बच के चला हूँ मैं आम राहों से,हटा सका न कोई मेरी रहगुज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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फिर एक बार तो देखो!
नज़र झुका के उठाई थी जैसे पहली बार,फिर एक बार तो देखो उसी नज़र से मुझे| गुलज़ार देहलवी
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ख़ुश-फ़हमियों के बुत तोड़े!
कितनी ख़ुश-फ़हमियों के बुत तोड़े,तू ने गुलज़ार ख़ुश-बयानी से| गुलज़ार देहलवी
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एहसान तेरा होगा मुझ पर!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में यह गीत- एहसान तेरा होगा मुझ पर, दिल चाहता है वो कहने दे!फिल्म-जंगलीगीतकार- हसरत जयपुरीसंगीतकार- शंकर जयकिशनगायक- मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद । ******
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सोनम वांगचुक का आमरण अनशन!
बहुत सी बार किसी कठिन विषय को छूने का मन होता है, आज का विषय भी ऐसा ही है।शिक्षा व्यवस्था में, प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, त्रुटिहीनता की व्यवस्था की मांग करना बहुत सही है, लेकिन क्या इस आंदोलन की, इस आमरण अनशन की दिशा और मंशा सही है? इससे पहले अन्ना हजारे जी का आमरण…