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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Jul 2026

    सैंया निकस गए मैं ना लड़ी थी!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से प्रस्तुत है मेरे स्वर में सत्यम शिवम सुंदरम फिल्म के आध्यात्मिक गीत का अंश- सैंया निकस गए मैं ना लड़ी थी! फिल्म- सत्यम शिवम सुंदरममुख्य कलाकार- शशि कपूर, जीनत अमानगीतकार- विट्ठल भाई पटेलसंगीतकार- लक्ष्मीकांत प्यारेलालगायिका- लता मंगेशकरप्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******

  • 15th Jul 2026

    थोड़ी सी सस्ती एक दिन!

    कैसे कैसे लोग दस्तारों* के मालिक हो गए,बिक रही थी शहर में थोड़ी सी सस्ती एक दिन|*पगड़ी मुनव्वर राना

  • 15th Jul 2026

    एक दिन ख़ाना-बदोशी!

    देने वाले ने तबीअ’त क्या अजब दी है उसे,एक दिन ख़ाना-बदोशी घर-गृहस्ती एक दिन| मुनव्वर राना

  • 15th Jul 2026

    फूल ने भूले से की थी!

    चूसता रहता है रस भौंरा अभी तक देख लो,फूल ने भूले से की थी सरपरस्ती एक दिन| मुनव्वर राना

  • 15th Jul 2026

    जंगल-परस्ती एक दिन!

    ख़ून रुलवाएगी ये जंगल-परस्ती एक दिन,सब चले जाएँगे ख़ाली कर के बस्ती एक दिन| मुनव्वर राना

  • 15th Jul 2026

    महँगाई के मौसम में ये!

    ऐ ख़ाक-ए-वतन तुझ से मैं शर्मिंदा बहुत हूँ,महँगाई के मौसम में ये त्यौहार पड़ा है| मुनव्वर राना

  • 15th Jul 2026

    दिन ढल जाए हाय रात ना जाए!

    मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज प्रस्तुत है मेरे स्वर में गाइड फिल्म का यह गीत – दिन ढल जाए हाय रात ना जाए, तू तो ना आए तेरी याद सताए!फिल्म-गाइड मुख्य कलाकार- देव आनंद, वहीदा रहमानगीतकार- शैलेन्द्र संगीतकार- सचिन देव बर्मन गायक- मोहम्मद रफ़ी प्रस्तुति- श्रीकृष्ण शर्मा आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद।…

  • 15th Jul 2026

    अन्त के बाद-1

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इसी शीर्षक से उनकी दो कविताएं हैं पहली यहाँ प्रस्तुत है। वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। आज प्रस्तुत हैं श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – अन्त के बादहम चुपचाप नहीं…

  • 14th Jul 2026

    ओढ़े हुए उम्मीद की !

    ओढ़े हुए उम्मीद की इक मैली सी चादर,दरवाज़ा-ए-बख़्शिश पे गुनहगार पड़ा है| मुनव्वर राना

  • 14th Jul 2026

    देख लो ये आज का!

    तुम कहते थे दिन हो गए देखा नहीं उस को,लो देख लो ये आज का अख़बार पड़ा है| मुनव्वर राना

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