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क्या जाने सितारे कैसे!
हाथ को हाथ नहीं सूझे वो तारीकी थी, आ गए हाथ में क्या जाने सितारे कैसे। जावेद अख़्तर
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कोई उम्र गुज़ारे कैसे!
हम ने ढूँडें भी तो ढूँडें हैं सहारे कैसेइन सराबों पे कोई उम्र गुज़ारे कैसे। जावेद अख़्तर
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श्रोताओं का दुख!
मेरे यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज कुछ हल्की-फुल्की बात- आशा है आपको पसंद आएगी,धन्यवाद। ******
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आ लौट के आ जा मेरे मीत!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- रानी रूपमती के लिए मुकेश जी का गाया गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे भरत व्यास जी ने लिखा था और इसका संगीतकार थे श्री एस. एन. त्रिपाठी- आ लौट के आ जा मेरे मीत, तुझे मेरे गीत बुलाते हैं! आशा है आपको…
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कुछ का व्यवहार बदल गया!
आज मैं फिर से श्रेष्ठ हिंदी कवि एक स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इनकी कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं।लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय श्रीकांत वर्मा जी की यह कविता– कुछ का व्यवहार बदल गया। कुछ का नहींबदला।जिनसे उम्मीद थी, नहीं बदलेगाउनका बदल गया।जिनसे आशंका थी,नहीं बदला।जिन्हें…